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Target News

शिमला । राजवीर दीक्षित

हिमाचल के 25 दवा उद्योगों में निर्मित 40 दवाएं व इंजेक्शन सब-स्टैंडर्ड पाए गए है। सीडीएससीओ द्वारा जारी ड्रग अलर्ट में सब-स्टेंडर्ड घोषित की गई दवाओं में से 50 प्रतिशत से अधिक का निर्माण हिमाचल की दवा कंपनियों में हुआ है।

सब-स्टैंडर्ड पाई गई दवाओं का निर्माण बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, सोलन, कालाअंब, पावंटा साहिब, संसारपुर टैरेस स्थित दवा उद्योगों में हुआ है।

जो दवाएं गुणवत्ता के पैमाने पर खरा नहीं उतर पाई है उनमें अस्थमा, बुखार, डायबिटीज, हाई बीपी, एलर्जी, मिर्गी, खांसी, एंटीबायोटिक, ब्रोंकाइटिस और गैस्ट्रिक के उपचार में इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं व इंजेकशन शामिल है। इसके अलावा कैल्शियम सप्लीमेंट सहित मल्टी विटामिन भी जांच में फेल हो गए है।

ड्रग विभाग सैंपल फेल होने वाले उद्योगों के खिलाफ विभाग कार्रवाई अमल में लाएगा। साथ ही बाजार से स्टाॅक वापस मंगाने को कहा गया है।

यह पहला मौका है, जब इतने ज्यादा सैंपल एक साथ फेल हुए है। हिमाचल में फेल होने वाली दवाओं में अस्थमा, उच्च रक्तचाप, मिर्गी, संक्रमण, एपिलेप्सी, विटामिन, दर्द व सूजन, बवासीर, बुखार, खांसी, कब्ज, अवसाद, शुगर, फंगस, पेट के कीड़े, टीबी व इंसुलिन की दवाएं शामिल हैं।

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बद्दी स्थित एलायंस बायोटेक द्वारा निर्मित रक्त के थक्के के उपचार के हेपरिन सोडियम इंजेक्शन के विभिन्न बैचों के आठ सैंपल फेल हुए है।

झाड़माजरी स्थित कान्हा बायोजेनेटिक में निर्मित विटामिन डी 3 टैबलेट के पांच सैंपल फेल हुए है। ड्रग अलर्ट में शामिल 25 दवा कंपनियां जांच के दायरे में है, जिनमें से कई कंपनियों में निर्मित दवाओं के सैंपल बार-बार फेल हो रहे है। काबिलेजिक्र है कि प्रदेश में दवाओं के लगातार दवाओं के सैंपल फेल होने का क्रम जारी है।

कहां-कहां हुई चैकिंग

बद्दी की एलाइंस बायोटेक कंपनी, काना बायोजेनेटिक कंपनी, बद्दी की बंसल फार्मा कंपनी, लोदी माजरा स्थित बायोकोट फार्मा, सोलन के चंबाघाट स्थित मायाफोर्ट फार्मा कंपनी, लोधी माजरा स्थित साईफाइन हिल केयर कंपनी, पांवटा साहिब की जी लेबोरेट्री कंपनी, सोलन के बड़ोग स्थित रोस रोबिज बायोटेक कंपनी, झाड़माजरी की मेसन फार्मा, बद्दी के काठा स्थित एलाइस बायोटेक कंपनी, बद्दी के भुड स्थित डीएम फार्मा कंपनी, कांगड़ा स्थित रेचिल फार्मा कंपनी, संडोली स्थित हेल्थ बायोटेक कंपनी, झाड़माजरी स्थित काना बायोजेनेटिक कंपनी, पांवटा के जी लेबोरेट्री कंपनी, बरोटीवाला की फार्मा रूट्स हेल्थकेयर कंपनी, पांवटा स्थित लेबोरेट फार्मा स्टिकल कंपनी, कालाअंब को आस्कर रेमिडीज,बरोटीवाला स्थित वीवीपीबी कंपनी, किशनपुरा स्थित एल्डर लैब कंपनी, कालाअंब स्थित प्रीमस फार्मास्युटिकल कंपनी, बद्दी के केप्सोपिट हेल्थकेयर, बरोटीवाला स्थित फार्मा रूट हेल्थ केयर, नालागढ़ के मिसा टिब्बा स्थित फंगस की दवा इट्राकोना जोल, कालाअंब स्थित ओरिजन फार्मा कंपनी, झाड़माजरी स्थित सेंकटस ग्लोबल कंपनी, बद्दी के किशनपुरा स्थित पेटाकम फार्मास्युटिकल कंपनी तथा झाड़माजरी स्थित डिक्सन फार्मा कंपनी।

डिप्टी ड्रग कंट्रोलर मनीष कपूर ने बताया कि कान्हा बायोजेनेटिक कंपनी के उत्पादन पर पहले ही विभाग ने रोक लगाई है। एलाइंस फार्मा कंपनी के दवाइयों की विभाग खुद भी जांच करेगा। संबंधित उद्योगों के खिलाफ विभाग ड्रग एंड काॅस्मेटक एक्ट के तहत कार्रवाई करेगा। खराब दवाई को बाजार से वापस लाने के लिए भी कहा गया है।

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