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नई दिल्ली । राजवीर दीक्षित

केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर ने नागरिका संशोधन अधिनियम (CAA) को लेकर बड़ा दावा किया है।

उन्होंने कहा कि CAA एक हफ्ते के अंदर देश में लागू कर दिया जाएगा। यह बात उन्होंने पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना के काकद्वीप में हुए कार्यक्रम के दौरान कही।

वह बोले-मैं मंच से गारंटी दे रहा हूं कि अगले 7 दिनों में सिर्फ बंगाल ही नहीं पूरे देश में इस कानून को लागू कर दिया जाएगा।

सीएए को लेकर शांतनु ठाकुर ने पिछले साल दिसंबर में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के उस भाषण का भी जिक्र किया।

जिसमें अमित शाह ने नागरिकता संशोधन अधिनियम को ‘देश का कानून’ बताया था और कहा था कि इसे लागू होने से कोई नहीं रोक सकता है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तब सीएए को लेकर लोगों को गुमराह करने का भी आरोप लगाया गया था।

नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार यह कानून लेकर आई थी।

CAA कानून के तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए प्रताडि़त और गैर मुस्लिमों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई) को भारत की नागरिता दी जाएगी।

यह कानून दिसंबर 2019 में संसद से पास हुआ था। संसद के पास होने के बाद इसे राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा गया था।

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हालांकि, इसके बाद कानून के विरोध में देश के अलग-अलग राज्यों में विरोध प्रदर्शन का सिलसिला शुरु हुआ था और दिल्ली में भी कई महीनों तक इसे लेकर धरना प्रदर्शन (शाहीन बाग समेत कुछ और इलाकों में) चला था।

5 साल पहले लगी थी मुहर

बता दें कि भारतीय नागरिकता (संशोधन) कानून पर 5 साल पहले ही मुहर लग गई थी। हालांकि, यह अब तक लागू नहीं हो पाया है।

CAA को लेकर पूरे देश में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। खासकर पूर्वोत्तर के सात राज्य इसके खिलाफ हैं।

विरोध को लेकर नॉर्थ ईस्ट सबसे ज्यादा प्रभावित रहा है। वहां तोडफ़ोड़ की वजह से करोड़ों की संपत्ति का नुकसान हुआ था।

इस कानून के खिलाफ विपक्ष का भी कड़ा रुख देखने को मिला था।

इस महीने की शुरुआत में खबर आई थी कि सी.ए.ए. के नियम केंद्र के पास तैयार हैं और लोकसभा चुनाव की घोषणआ से पहले अधिसूचित (नोटिफाई) कर दिया जाएगा।

क्या है CAA ?

सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट के लागू होने पर तीन पड़ोसी मुस्लिम बाहुल्य देशों पाकिस्तान, बांग्ला देश और अफगानिस्तान से आए उन लोगों को भारत की नागरिकता मिल जाएगी, जो दिसंबर 2014 तक किसी न किसी प्रताडऩा का शिकार होकर भारत आए।

इसमें गैर-मुस्लिम माइनोरिटी-हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और इसाई शामिल हैं।

नागरिकता संशोधन बिल पहली बार 2016 में लोकसभा में पेश किया गयाा था। यहां से तो ये पास हो गया था, लेकिन राज्यसभा में अटक गया था।

बाद में इसे संसदीय समिति के पास भेजा गया और फिर 2019 का चुनाव आ गया। फिर से मोदी सरकार बनी।

दिसंबर 2019 में इसे लोकसभा में दोबारा पेश किया गया। इस बार ये बिल लोकसभा और राज्यसभा, दोनों जगह से पास हो गया।

10 जनवरी 2020 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई थी लेकिन उस समय कोरोना के कारण इसमें देरी हुई।

क्या मंजूरी मिलने के 5 साल बाद लागू हो पाएगा सीएए?

CAA को लेकर साल 2020 से लगातार एक्सटेंशन लिया जा रहा है। दरअसल, संसदीय प्रक्रियाओं की नियमावली के मुताबिक किसी भी कानून के नियम राष्ट्रपति की सहमति के 6 महीने के भीतर तैयार किए जाने चाहिए।

ऐसा न होने पर लोकसभा और राज्यसभा में अधीनस्थ विधान समितियों से विस्तार की मांग की जानी चाहिए।

सीएए के केस में 2020 से गृह मंत्रालय नियम बनाने के लिए संसदीय समिति से नियमित अंतराल में एक्सटेंशन लेता रहा है।

9 राज्यों के डीएम को क्या मिले अधिकार?

पिछले दो साल में 9 राज्यों के 30 से ज्यादा जिला मजिस्ट्रेटों और गृह सचिवों को बड़े अधिकार दिए गए हैं।
डीएम को तीन देशों से आए गैर मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदायों को भारतीय नागरिकता देने की शक्तियां दी गई हैं।

नागरिकता गृह मंत्रालय की 2021-22 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक अल्पसंख्यक समुदायों के कुल 1,414 विदेशों को भारतीय नागरिकता दी गई है।

जिन 9 राज्यों में नागरिकता दी गई है, वे गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और महाराष्ट्र हैं।

बंगाल ने सीएए के खिलाफ पारित किया था प्रस्ताव

वैसे, बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी सरकार ने 2020 में सीएए के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया था।

इस तरह का प्रस्ताव लाने वाला पश्चिम बंगाल चौथा राज्य बन गया था। ममता बनर्जी ने तब घोषणा की थी, ‘बंगाल में हम सीएए, एनपीआर और एनआरसी लागू नहीं होने देंगे।’

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