श्री आनंदपुर साहिब से सांसद के मोहाली में लगे है ‘लापता’ होने के पोस्टर, अब चंडीगढ़ में चुनाव लड़ रहे मनीष तिवारी को अपनो से ही भीतरघात का खतरा।

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चंडीगढ़ । राजवीर दीक्षित

श्री आनंदपुर साहिब से सांसद मनीष तिवारी के चुनावों में भगौड़ा होने के बाद यहां से उम्मीदवार उतारना कांग्रेस के लिए चैलेंज बना हुआ है। इसके इलावा चंडीगढ़ से चुनाव लड़ने जा रहे मनीष तिवारी को घेरने के लिए उन्ही की पार्टी के लोगो ने जोरदार तरीके से तैयारी की है।

श्री आनंदपुर साहिब से चंडीगढ़ चुनाव लड़ने के लिए ‘शिफ्ट’ हुए मनीष तिवारी को अब कांग्रेसियों की नाराजगी से गुजरना पड़ रहा है। उन्हें यहां भीतरघात का खतरा डरा रहा है। यहां से पूर्व सांसद पवन बंसल व प्रधान हरमोहिंदर सिंह लक्की टिकट के प्रबल दावेदार थे

सूत्र बताते है कि मनीष तिवारी पर बाहरी होने का दोष लगाते इस बात का प्रचार शुरू किया गया है कि जो श्री आनंदपुर साहिब से सांसद होने के बावजूद वहां से भाग खड़ा हुआ वह चंडीगढ़ में क्या काम करवाएंगे।

बात में दम उस वक्त देखने को मिलता है कि 5 सालों तक अपने लोकसभा क्षेत्र श्री आनंदपुर साहिब में न आने के दौरान जनता मनीष तिवारी के लापता होने के पोस्टर तक लगा चुकी है। इस बारे में पूछने पर तिवारी कोई जवाब तक नहीं देते।

आपको बता दें, यह पोस्टर चंडीगढ़ सीमा पर बने मोहाली में भी लगे है कोई भी इस बात की पुष्टि कर सकता है। जिसमे मनीष तिवारी को ढूंढने वाले को 10 हजार तक का इनाम देने की बात भी लिखी गई है।

इसके इलावा श्री आनंदपुर साहिब के कई केंद्रीय प्रोजेकटो के बनने में देरी होने के बावजूद सांसद ने इस मसले में कोई रुची नही दिखाई जिससे नंगल जैसे बेहतरीन शहर का कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हो गया। जिसमे सबसे चर्चित नंगल बांध पर बहुकरोड़ी ‘फ्लाईओवर’ पुल है जिसे बनने में 3 साल की देरी हुई।

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आपको बता दें, मनीष तिवारी 5 साल तक श्री आनंदपुर साहिब लोकसभा में नही आये जिसका खामियाजा कांग्रेस की लोकल लीडरशिप तक को भुगतना पड़ा। विधानसभा चुनावों में जिस तरह से कांग्रेसी उम्मीदवारों की हार हुई उसे लेकर खुद पार्टी हाईकमान तक हैरान थी।

अकेले श्री आनंदपुर साहिब व नंगल इलाका केंद्रीय कर्मचारियों का वर्चस्व है यहां के लोगों के छोटे छोटे मसले केंद्रीय कार्यालय में मसलन एनएफएल, बीबीएमबी से हल होने होते है। किसी का भी काम न होने से नाराज जनता ने यहां के कांग्रेसी उम्मीदवार व पूर्व विधानसभा स्पीकर के पी एस राणा को करीब 48 हजार वोटो से हरा कर भेजा जिसके लिए भी सांसद मनीष तिवारी को कसूरवार बताया गया।

चंडीगढ़ को सेफ बताते व अपने निजी रसूख का हवाला देकर लोकसभा की टिकट पाने वाले मनीष तिवारी के खिलाफ बड़ा फेक्टर यह रहा है कि वह जहां जहां से चुनाव लड़े फिर दुबारा उस इलाके का रुख उन्होंने नही किया।

इस दफा भाजपा ने लोकल उम्मीदवार संजय टण्डन को चुनावी मैदान में उतारा है आने वाले दिनों में देखना होगा बीजेपी इस फेक्टर को कितना कैश कर पाती है।