हैरानीजनक: कांग्रेस की टिकट पर गुरजीत राणा की दो हलकों में तैयारी; श्री आनंदपुर साहिब व खडूर साहिब में वर्करों को कर रहे है एक्टिव, केपी का कभी लिस्ट में नाम ही नही था, घोषणा किसी भी वक्त। पढ़ें और रोचक जानकारी।

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चंडीगढ़ । राजवीर दीक्षित

कांग्रेस को जहां लोकसभा उम्मीदवारों की सूची जारी करने में चैलेंज आ रहा था वही हलका श्री आनंदपुर साहिब व खंडूर साहिब से पार्टी के दिग्गज नेता और कपूरथला के विधायक राणा गुरजीत सिंह व उनके बेटे राणा इंद्रपीत सिंह ने दोनों सीटों पर टिकट की दावेदारी ठोक कर सबको हैरान कर दिया है।

राणा गुरजीत सिंह दोनों हलके के नेताओं को एक साथ साधने में भी जुटे हुए हैं। इसके लिए वह नेताओं से मुलाकात के अलावा फोन पर बातचीत कर रहे हैं। साथ ही सबको यहीं कहा जा रहा है कि अगर पार्टी उन्हें टिकट देती है, तो फिर उन्हें उनके साथ चलना होगा। जिसको लेकर कांग्रेस खेमे में जोश भी देखा जा सकता है।

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आपको बता दे, हलका आनंदपुर साहिब से राणा गुरजीत ने कभी चुनाव नहीं लड़ा है, लेकिन फिर भी उनकी छवि और व्यवहार से यहां के वर्कर और दिग्गज कायल हैं। यहां से मौजूदा सांसद मुनीश तिवारी को साजिश के तहत यहां से भेजने में पूर्व विधानसभा स्पीकर राणा केपी का हाथ माना जा रहा है, जिसकी कांग्रेस वर्करों में आम चर्चा भी है।

2022 के विधानसभा चुनाव में जब पूरे राज्य में आप की हवा थी, तो उस समय राणा गुरजीत सिंह कपूरथला से तीसरी बार विधायक बने, जबकि उनका बेटा इंद्रप्रीत सिंह सुल्तानपुर लोधी से आजाद जीतकर विधानसभा पहुंचा गया था।

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जबकि श्री आनंदपुर साहिब से विधानसभा स्पीकर राणा के पी 45 हजार से ज्यादा वोटों से हार गए थे। कांग्रेस खेमे में कई बार इस बात की चर्चा सुनने में मिली है कि के पी एस राणा भी लोकसभा चुनावों में यहां से इच्छुक दावेदार है और उनका नाम भी सूची में आ रहा है।

लेकिन कांग्रेस के ही दिल्ली से उच्चपदस्थ सूत्रों के अनुसार केपी राणा का नाम कभी भी सूची में नही आया बल्कि कांग्रेस हाईकमान पर उनके भाजपा में शामिल होने की कोशिश का समाचार काफी चर्चा का केंद्र बना रहा है। उन्हें दूसरे राज्य में प्रभारी बनाये जाने के पीछे की कहानी भी आपके सामने हम जल्द ही प्रकाशित करेंगे।

यह भी लिखना जरूरी है केपीएस राणा ने अपने वर्करों को चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहने को कहा गया वह सब एक प्रचार का माध्यम है कि जो भी चुनाव में उम्मीदवार होगा उसे यह बताया जाएगा मेरी टीम तैयार थी हाईकमान के आदेश है चलो कोई न मदद आपकी कर देते है।

वैसे केपीएस राणा सुलझे हुए सियासतदान है। जिनकी नाराजगी से डरते मनीष तिवारी ने श्री आनंदपुर साहिब से किनारा कर लिया। उनकी तमाम रणनीति की चर्चा उनके वर्कर आम तौर पर करते रहते है।

श्री आनंदपुर साहिब लोकसभा हलके की 9 सीटों से से 6 पर आप का कब्जा है। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस, पर्यटन मंत्री अनमोल गगन मान व विधानसभा के डिप्टी स्पीकर जय कृष्ण रोडी इसी हलके से आते हैं।

ऐसे में सूत्र मानते हैं कि, राणा गुरजीत सिंह या उनके परिवारिक मेंबर ही इन्हें टक्कर दे सकते हैं। जबकि इन हलकों के लोकल नेताओं का जबरदस्त विरोध भी है, सभी हलकों में बने ग्रुप राणा गुरजीत सिंह के साथ चल सकते हैं। इसी तरह खडूर साहिब में वह खुद विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। वहीं, मौजूदा समय में वह कपूरथला से विधायक हैं, जबकि उनके बेटे से विधायक सुल्तानपुर लोधी से विधायक है।

इसके अलावा उनका इसी एरिया में कारोबार भी है। चुनावी माहिर लव कुमार गोलडी मानते हैं कि राणा राजनीति के माहिर खिलाड़ी हैं। उन्हें हर हालत में खेलना आता हैं। उनका नाम भी उनकी ताकत है।

कांग्रेस की टिकट अनाउंस न होने की वजह से हर रोज दोनों लोकसभा हलकों में समीकरण बदल रहे हैं। श्री आनंदपुर साहिब से पूर्व विधायक बलबीर सिंह सिद्धू, अंगद सैनी, वरिंदर ढिल्लों ने दावेदारी पेश की है। तीनों के दिल्ली में लिंक भी अच्छे हैं। इसके अलावा राणा गुरजीत सिंह के नाम की चर्चा पहले नम्बर पर है। वहीं, सीनियर नेता अंबिका सोनी भी इस हलके में रुचि है।

अम्बिका सोनी 2014 में यहां से चुनाव हार गई थी। उस हार का ठीकरा भी यहां के ही चर्चित पूर्व विधायक पर ही फूटा था। आज की चर्चा है कि पूर्वमंत्री विजय इंद्र सिंगला को भी श्री आनंदपुर साहिब हलके से टिकट मिल सकती है। क्योंकि इस हलके में हिंदू वोटर भी अधिक हैं।

जबकि खंडूर साहिब डिंपा के पीछे हटने के बाद लोकल नेता दौड़ में है। पूर्व विधायक सुखपाल सिंह भुल्लर, कुलबीर सिंह जीरा और पूर्व मंत्री गुरचेत सिंह भुल्लर भी टिकट के लिए जोड़ तोड़ कर रहे हैं। वहीं डिंपा के भाई राजन गिल भी टिकट के लिए पसीना बहा रहे हैं।