ऐसा भी होता है क्या: कांग्रेसी नेतायों से पूछने लगे थे लोग सांसद मनीष तिवारी साहिब, कहां हैं 5 साल से जनाब। श्री आनंदपुर साहिब में अब नहीं मिल रहा पार्टी को उम्मीदवार, हारे या नकारे पर ही दांव खेलने की तैयारी में पार्टी।

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श्री आनंदपुर साहिब/ चंडीगढ़ । राजवीर दीक्षित

इलाके की अनदेखी के कारण राजनीति में ‘हद से वद्द’ हो जाने वाली घटना आपको बताने जा रहे है। 5 साल पहले श्री आनंदपुर साहिब लोकसभा सीट से बम्पर वोटों के साथ जीते मनीष तिवारी के अचानक यहां की सियासत से भगोड़ा हो जाने के बाद कांग्रेस पार्टी का विश्वास जनता में कम होता जा रहा है।

अकाली दल के दिग्गज उम्मीदवार प्रो प्रेम सिंह चंदूमाजरा को 46884 वोटों से हराने वाले मनीष तिवारी इस दफा चंडीगढ़ से चुनाव लड़ रहे है। उनका राजनीतिक ग्राफ बड़ी ही तेजी से नीचे की तरफ आया है।

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आपको बता दें अब तो इलाके के लोग भी सार्वजनिक मंचों से कांग्रेसी नेताओं से पूछने लगे थे की, सांसद मनीष तिवारी साहिब, कहां हैं पिछले 5 साल से जनाब। जिसे लेकर उन्हें कोई जवाब ही नही सूझता था।

मनीष तिवारी की तरफ से अपने कार्यकाल के दौरान लोकसभा श्री आनंदपुर साहिब में कही भी न पहुंचने के कारण जनता में काफी आक्रोश देखने को मिला। इस बात का खामियाजा इस दफा के कांग्रेस की टिकट पाने वाले उम्मीदवार को उठाना पड़ेगा।

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आपको यह पढ़ कर हैरानी होगी कि सांसद मनीष तिवारी को अपने लोकसभा में शामिल 9 विधानसभा के गांवों के नाम तक भी नही पता है। जिसे लेकर कई दफा कांग्रेसी वर्करों में ही आपस मे शर्त लग चुकी है। जिसकी खूब चर्चा भी है।

चंडीगढ़ से इस बार कांग्रेस की टिकट से चुनाव लड़ने जा रहे सांसद मनीष तिवारी की वहां भी हालत काफी पतली है। पुराने कांग्रेसियों ने तिवारी को सबक सिखाने का मन बनाया है।

यहां से सबसे मजबूत उम्मीदवार व पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल ही थे। पार्टी में उन्हें किनारे करने का सीधा सीधा मतलब चंडीगढ़ में कांग्रेस को शून्य पर ले जाना है।

कांग्रेस की तरफ से मनीष तिवारी को टिकट दिए जाने के बाद व उसके बाद श्री आनंदपुर साहिब में तिवारी के कारण पार्टी के गिरे ग्राफ का असर यह है कि अब यहां कोई उम्मीदवार ही पार्टी को नही मिल रहा है।

जिससे हारे या नकारे हुए उम्मीदवार पर लगातार केंद्रीय CWC की बैठकों में आखरी फैसला लिया जा सकता है।

फिलहाल आप व अकाली दल ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर प्रचार शुरू कर दिया है।

हिन्दू वोट बैंक वाली श्री आनंदपुर साहिब लोकसभा सीट पर फिलहाल उतरे दोनों उम्मीदवार सिख समुदाय से सम्बन्ध रखते है। जबकि भाजपा व कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार की अभी घोषणा करनी है।