खास खबर: 70 साल पहले ‘पंचशील समझौते’ को लेकर नंगल का नाम है खास। पढ़ें सारी जानकारी

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नंगल । राजवीर दीक्षित

देश के आधुनिक मंदिर के नाम से मशहूर व हरित क्रांति लाने में अपना खास योगदान देने वाले भाखड़ा बांध व केंद्र सरकार की कंपनी नेशनल फर्टिलाइजर लिमिटेड के नाम से मशहूर नंगल में आज का दिन खास महत्त्व रखता है।

आजादी के बाद जब देश में हरित क्रांति लाने के सपने को साकार करने के लिए भाखड़ा बांध व एन एफ एल जैसी कंपनी का निर्माण हो रहा था, तब सभी देशों के लोग यह देखने में उत्सुक थे कि भारत में एक बड़ा बांध बन रहा है।

Video वीडियो देखने के लिए इस लिंक को Click करें, किस तरह प्रोजेक्ट का मलबा नंगल डैम में आ पहुंचा है।

इस वजह से भारत की तरक्की के प्रति उत्साहित विभिन्न देशों के प्रतिनिधि समय-समय पर भाखड़ा बांध का निर्माण देखने के लिए आते रहे हैं। इस दौरान ही चीन के पूर्व प्रधानमंत्री चऊं इन लेई दुनिया के इस बेहतरीन प्रोजेक्ट भाखड़ा बांध को देखने आए थे।

तब से बरकरार बांध के आकर्षण के चलते यहां हर वर्ष पांच लाख से अधिक पर्यटक आधुनिक भारत के मंदिर भाखड़ा बांध को देखने आते हैं।

जब बांध बन रहा था उस समय भी देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. पंडित जवाहर लाल नेहरू विदेशों से विशेष अतिथियों को आमंत्रित करके अक्सर यह दिखाया करते थे कि अब भारत आत्मनिर्भर बनने जा रहा है। सभी बांध के निर्माण को देखकर आश्चर्यचकित हुआ करते थे।

आज यही बांध विभिन्न प्रांतों की आर्थिक समृद्धि का आधार बना हुआ है बरसात के दिनों में बाढ़ से राहत दिलाने के साथ ही गर्मियों के दिनों में पीने योग्य पानी प्रांतों को उपलब्ध करवाने व मात्र 40 पैसे प्रति यूनिट बिजली उत्पादन करके देश की तरक्की में योगदान दे रहा है।

भाखड़ा बांध परियोजना के निर्माण काल समय 70 वर्ष पूर्व आज ही के दिन 28 अप्रैल 1954 को भारत व चीन के मध्य पंचशील समझौता हुआ था। जिसे नंगल के सतलुज सदन विश्राम गृह में किया गया। इस जगह कांच से बना कमरा व पंडित नेहरू जिस जगह रहते थे वह धरोहर आज भी संजो कर रखी गई है।