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पंजाब की सियासत में Pathak की बढ़ी भूमिका! अमित शाह से मुलाकात के बाद BJP में नई जिम्मेदारी के संकेत
नई दिल्ली । राजवीर दीक्षितपंजाब से राज्यसभा सांसद संदीप पाठक ने बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भाजपा में आए नेताओं में संगठन में अहम जिम्मेदारी पाने वाले पाठक फिलहाल इकलौते नेता हैं। शाह से उनकी मुलाकात के बाद भाजपा की पंजाब रणनीति में उन्हें महत्वपूर्ण भूमिका दिए जाने की अटकलें तेज हो गई हैं।हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन द्वारा किए गए संगठनात्मक फेरबदल में पाठक को पार्टी के 16 राष्ट्रीय सचिवों में शामिल किया गया है।अमित शाह से मुलाकात के बाद पाठक ने कहा, “कल माननीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी से मिलने का सौभाग्य मिला। उनके समय, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन के लिए आभारी हूं। विकसित भारत के विजन को आगे बढ़ाने और पार्टी को और मजबूत करने में योगदान देने के लिए उत्साहित हूं।”पंजाब में मिल सकती है अहम जिम्मेदारीभाजपा के भीतर यह चर्चा है कि संदीप पाठक को पंजाब में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले पाठक ने पंजाब में AAP के लिए मजबूत जमीनी नेटवर्क तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी। उस समय वह AAP के पंजाब प्रभारी थे और पार्टी की ऐतिहासिक जीत में उनकी रणनीति को महत्वपूर्ण माना गया था।डेटा एनालिसिस और आंकड़ों के गहन अध्ययन में विशेषज्ञता रखने वाले पाठक ने चुनावी रणनीति तैयार करने के लिए जमीनी फीडबैक और आंकड़ों का इस्तेमाल किया था।IIT-दिल्ली के पूर्व प्रोफेसर हैं पाठकसंदीप पाठक IIT-दिल्ली के पूर्व असिस्टेंट प्रोफेसर रह चुके हैं। उन्हें पंजाब की राजनीति और राज्य के कई मौजूदा विधायकों के बारे में गहरी जानकारी है। 2022 में टिकटों के चयन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।भाजपा अब पंजाब में नई रणनीति तैयार करने के लिए पाठक की विशेषज्ञता का इस्तेमाल कर सकती है। पार्टी के आंतरिक सर्वे में कई मौजूदा AAP विधायकों के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी के संकेत मिलने की खबरें हैं।AAP के बागियों पर भी BJP की नजरआने वाले समय में भाजपा पंजाब में AAP के बागी नेताओं को भी अपने लिए अहम मान सकती है। माना जा रहा है कि एंटी-इनकंबेंसी से निपटने के लिए अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली AAP कई मौजूदा विधायकों के टिकट काट सकती है।ऐसे में पाठक पंजाब में सत्तारूढ़ पार्टी के विधायकों के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी के असर और AAP से अलग हुए नेताओं की चुनावी क्षमता का आकलन करने में भूमिका निभा सकते हैं।BJP-अकाली दल गठबंधन पर भी नजरसंदीप पाठक भाजपा के लिए उन सीटों की पहचान करने में भी मदद कर सकते हैं, जहां पार्टी की जीत की संभावनाएं मजबूत हों। इसी बीच भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच भी पर्दे के पीछे बातचीत जारी रहने के संकेत हैं। दोनों दल आगामी चुनाव से पहले संभावित गठबंधन को लेकर विचार-विमर्श कर रहे हैं।











