शिमला । राजवीर दीक्षित
मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu ने सदन में इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि इस सेस का उद्देश्य अनाथ बच्चों और विधवाओं के लिए स्थायी आर्थिक सहायता सुनिश्चित करना है। सरकार के अनुसार, पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की पहली बिक्री पर यह विशेष सेस वसूला जाएगा। हालांकि इसकी सटीक दर अधिसूचना के जरिए तय की जाएगी, लेकिन राजनीतिक और आर्थिक हलकों में चर्चा है कि यह बढ़ोतरी सीधे 5 रुपये तक जा सकती है।
वहीं विपक्ष ने इस फैसले को आम जनता पर सीधा आर्थिक हमला बताया है। भाजपा विधायक Randhir Sharma ने कहा कि प्रदेश में पहले ही पेट्रोल पर 17.50 रुपये और डीजल पर 13.09 रुपये वैट (VAT) वसूला जा रहा है। ऐसे में अगर 5 रुपये का नया सेस जुड़ता है, तो पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर और डीजल 90 रुपये के पार पहुंच सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि पड़ोसी राज्यों की तुलना में महंगे ईंधन से परिवहन और रोजमर्रा के खर्चों में भारी इजाफा होगा।
इस बिल को लेकर सिर्फ टैक्स ही नहीं, बल्कि इसके नाम को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष का कहना है कि ‘अनाथ और विधवा’ जैसे संवेदनशील शब्दों का इस्तेमाल टैक्स के नाम में करना उचित नहीं है और यह भावनात्मक मुद्दों का राजनीतिक इस्तेमाल है।
गौर करने वाली बात यह है कि यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें पहले ही अस्थिर बनी हुई हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते वैश्विक बाजारों में तेल को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे हालात में राज्य सरकार का यह कदम आम आदमी के बजट को और ज्यादा प्रभावित कर सकता है।
इससे पहले भी हिमाचल सरकार ईंधन की कीमतों में 7 रुपये तक की बढ़ोतरी कर चुकी है, जिससे जनता पहले ही दबाव में है। अब इस नए सेस के बाद महंगाई का असर और गहरा होने की आशंका जताई जा रही है।
विधानसभा से बिल पास होने के बाद अब इसे राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। जैसे ही इसे हरी झंडी मिलती है, प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की नई दरें लागू हो जाएंगी। आने वाले दिनों में यह फैसला राजनीतिक और आर्थिक दोनों ही स्तर पर बड़ा मुद्दा बन सकता है।



















