चंडीगढ़ | राजवीर दीक्षित
(Major Irregularity in Medicines: 90 Drugs Under Investigation) भारत में दवाइयों को लेकर एक बड़ी चिंता सामने आई है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने देशभर में 90 फिक्स्ड डोज़ कॉम्बिनेशन (FDCs) दवाओं की जांच के आदेश दिए हैं। इनमें आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली दवाएं जैसे पैरासिटामोल, मल्टीविटामिन, फोलिक एसिड, सिरप, क्लोट्रिमेज़ोल और बीटामेथासोन क्रीम, डाइक्लोफेनाक पोटेशियम और डाइसाइक्लोमाइन जैसी दवाएं शामिल हैं।
ANI को मिले एक आधिकारिक पत्र के अनुसार, इन दवाओं के सैंपल वर्ष 2025 के SUGAM लैब टेस्टिंग डेटा में बिना मंज़ूरी के पाए गए हैं। नियमों के मुताबिक, कोई भी “नई दवा” तब तक बाजार में नहीं लाई जा सकती जब तक उसे केंद्र या राज्य की लाइसेंसिंग अथॉरिटी से मंजूरी न मिल जाए। लेकिन इन दवाओं का बिना उचित अनुमति के सप्लाई चेन में पाया जाना जन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
DCGI ने सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के ड्रग कंट्रोलर्स को निर्देश दिया है कि वे इन दवाओं की जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि इन्हें वैध मंजूरी मिली है या नहीं। साथ ही, संबंधित दवा निर्माताओं और मार्केटिंग कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को भी कहा गया है।
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यह “Drugs and Cosmetics Act, 1940” और “New Drugs and Clinical Trials Rules, 2019” के उल्लंघन की ओर इशारा करता है। अगर इन दवाओं को बिना मंजूरी के बेचा जा रहा है, तो यह लोगों की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ हो सकता है।
फिलहाल, अधिकारियों से जल्द से जल्द Action Taken Report (ATR) जमा करने को कहा गया है। आम लोगों के लिए यह जरूरी है कि वे बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयों का सेवन न करें और केवल प्रमाणित व विश्वसनीय दवाएं ही इस्तेमाल करें।



















