नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित
(The Truth Behind Swiss Bank Savings: No Interest on ₹10 Lakh Deposit)स्विस बैंकों को लेकर लोगों के मन में हमेशा से एक खास आकर्षण रहा है—गोपनीयता, सुरक्षा और ग्लोबल प्रतिष्ठा। आम धारणा है कि यहां पैसा जमा करने से ऊँचा ब्याज मिलता है और संपत्ति तेजी से बढ़ती है। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट है, और यह रिपोर्ट इसी सच्चाई को उजागर करती है।
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स्विट्ज़रलैंड की बैंकिंग प्रणाली भारत से पूरी तरह अलग काम करती है। यहां के सामान्य बचत खाते लगभग 0% ब्याज देते हैं। यानी आपका पैसा सिर्फ सुरक्षित रहता है, उस पर कोई आमदनी नहीं होती। यही नहीं, यदि खाते में बड़ी रकम रखी जाए, तो कई स्विस बैंक नकारात्मक ब्याज या स्टोरेज फीस भी वसूलते हैं। इसका मतलब है कि ब्याज कमाने की बजाय आपको हर साल बैंक को शुल्क देना पड़ सकता है।
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यही कारण है कि लोग स्विस बैंक में पैसा ब्याज कमाने के लिए नहीं रखते, बल्कि—
* वित्तीय गोपनीयता
* राजनीतिक स्थिरता
* संपत्ति सुरक्षा
* दीर्घकालिक भरोसे
जैसे कारणों से वहां खाते खोलते हैं।
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उच्च नेटवर्थ वाले ग्राहक कस्टमाइज्ड निवेश योजनाओं का लाभ उठाते हैं, जिनका रिटर्न पूरी तरह वैश्विक बाज़ार और निवेश माहौल पर निर्भर करता है—यह ब्याज आधारित नहीं होता।
यदि कोई व्यक्ति 10 लाख रुपये को स्विस फ़्रैंक में बदलकर बिना किसी निवेश के 5 साल तक बैंक में रखे, तो रकम न तो बढ़ेगी और संभव है थोड़ी घट भी जाए। भारत लौटते समय राशि का मूल्य सिर्फ रुपया–फ्रैंक विनिमय दर पर निर्भर करेगा, न कि ब्याज पर।
स्पष्ट है—स्विस खाते बचत बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन और सुरक्षा के लिए खोले जाते हैं।
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