500 साल की परंपरा टूटी, बिना बालभोग भी हुए बांके बिहारी के दर्शन

द टारगेट न्यूज डेस्क
(Banke Bihari Temple Breaks 500-Year-Old Tradition)वृंदावन के विश्वविख्यात श्री बांके बिहारी मंदिर से जुड़ी एक अभूतपूर्व घटना ने श्रद्धालुओं के साथ-साथ मंदिर प्रशासन को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। सोमवार को मंदिर के 500 वर्षों के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ, जब ठाकुर बांके बिहारी जी को न तो प्रातःकालीन बाल भोग अर्पित किया गया और न ही रात्रि का शयन भोग। हालांकि इसके बावजूद ठाकुर जी ने भक्तों को दर्शन दिए, लेकिन सदियों से चली आ रही भोग अर्पण की परंपरा का इस तरह टूटना गहरी चिंता और सवालों का कारण बन गया है।

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मामले की जड़ मंदिर में भोग और प्रसाद व्यवस्था से जुड़ी बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक उच्च-शक्ति समिति मंदिर के भोग-प्रसाद प्रबंधन की निगरानी करती है। इसी व्यवस्था के तहत एक हलवाई को ठाकुर जी के लिए भोग तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है, जिसे करीब 80 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है। लेकिन पिछले कई महीनों से वेतन न मिलने के कारण हलवाई ने बाल भोग और शयन भोग तैयार नहीं किया, जिससे यह ऐतिहासिक स्थिति उत्पन्न हो गई।

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मंदिर के गोस्वामियों का कहना है कि ठाकुर बांके बिहारी जी को प्रतिदिन चार बार भोग अर्पित किया जाता है और यह परंपरा आस्था से जुड़ी हुई है। ऐसे में प्रशासनिक लापरवाही ने न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत किया है, बल्कि मंदिर की व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

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घटना के बाद गोस्वामियों में रोष देखा गया, वहीं हाई पावर कमेटी ने मामले में त्वरित हस्तक्षेप का आश्वासन दिया है। समिति के सदस्य दिनेश गोस्वामी के अनुसार संबंधित व्यक्ति से बात कर हलवाई को तुरंत भुगतान के निर्देश दिए गए हैं और भविष्य में ऐसी चूक न हो, इसके लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। यह मामला अब श्रद्धा, परंपरा और प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा उदाहरण बन गया है।

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