नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित
(HC Sets Aside Censor Order, Vijay’s ‘Jana Nayagan’ Release in Doubt)तमिल सिनेमा के सुपरस्टार विजय की बहुचर्चित फिल्म ‘जना नायगन’ को मद्रास हाईकोर्ट के ताज़ा फैसले से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उस एकल न्यायाधीश के आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को फिल्म को तत्काल सेंसर सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया गया था। इस फैसले के बाद फिल्म की रिलीज़ पर अनिश्चितता के बादल गहरा गए हैं और दर्शकों में भी निराशा देखने को मिल रही है।
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मुख्य न्यायाधीश एम.एम. श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की प्रथम पीठ ने कहा कि एकल न्यायाधीश को CBFC को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का पर्याप्त अवसर देना चाहिए था। कोर्ट के इस रुख से साफ है कि सेंसर प्रक्रिया में नियमों और प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य माना गया है। फिल्म पहले इसी महीने पोंगल के मौके पर रिलीज़ होने वाली थी, लेकिन अब इसकी तारीख पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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‘जना नायगन’ को लेकर चर्चा इसलिए भी तेज है क्योंकि इसे अभिनेता विजय की आखिरी फिल्म बताया जा रहा है। खबरों के मुताबिक, इसके बाद विजय पूरी तरह से राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने वाले हैं। ऐसे में यह फिल्म न सिर्फ सिनेमाई, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी खास मानी जा रही है।
हाईकोर्ट ने फिल्म के निर्माता केवीएन प्रोडक्शंस एलएलपी को मामले के शीघ्र निपटारे के लिए फिर से एकल न्यायाधीश के समक्ष जाने की छूट दी है। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि एकल न्यायाधीश यह तय करने के लिए स्वतंत्र होंगे कि मामले को रिवाइजिंग कमेटी को भेजने का फैसला सही था या नहीं।
इस पूरे घटनाक्रम ने फिल्म इंडस्ट्री में सेंसर प्रक्रिया, रचनात्मक स्वतंत्रता और कानूनी हस्तक्षेप को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सबकी निगाहें अदालत के अगले फैसले पर टिकी हैं, जो ‘जना नायगन’ की किस्मत तय करेगा।

















