नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित
(Indian Rupee Hits Record Low Against US Dollar)भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक अहम संकेत देते हुए गुरुवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया 92.00 प्रति डॉलर के स्तर तक फिसल गया, जिसे ऑल-टाइम लो माना जा रहा है। यह गिरावट न केवल वित्तीय बाजारों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी इसका सीधा असर पड़ने वाला है।
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विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये की कमजोरी के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 4 प्रतिशत महंगा होकर 69.30 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे रुपये पर अतिरिक्त दबाव बनता है।
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इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिज़र्व द्वारा साल 2026 की पहली मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों को बिना बदलाव के रखने से डॉलर मजबूत हुआ है। डॉलर इंडेक्स में आई तेजी का सीधा असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर पड़ा है, जिसमें भारतीय रुपया भी शामिल है।
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घरेलू शेयर बाजार की गिरावट ने भी रुपये की कमजोरी को और बढ़ाया है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की धारणा कमजोर हुई। वहीं, जनवरी महीने के अंत में आयातकों और कंपनियों की ओर से डॉलर की बढ़ती मांग ने भी रुपये को और दबाव में डाल दिया।
इस गिरावट का असर आम लोगों पर साफ नजर आएगा। विदेश यात्रा, विदेशी शिक्षा और आयातित वस्तुएं महंगी होंगी। साथ ही, ईंधन की कीमतें बढ़ने से परिवहन और रोजमर्रा की जरूरतों का खर्च भी बढ़ सकता है। ऐसे में रुपये की चाल आने वाले दिनों में देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है।

















