नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित
(Nipah Virus Detected in India, WHO Downplays Risk)भारत में एक बार फिर निपाह वायरस की मौजूदगी ने स्वास्थ्य तंत्र और आम जनता का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में निपाह वायरस के दो मामलों की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने स्थिति का आकलन करते हुए साफ किया है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है और वायरस के बड़े स्तर पर फैलने का जोखिम कम है।
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WHO के अनुसार, मौजूदा मामलों में न तो मानव से मानव संक्रमण के प्रमाण मिले हैं और न ही ऐसी कोई स्थिति है, जिससे अंतरराष्ट्रीय यात्रा या व्यापार पर प्रतिबंध लगाए जाएं। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर जोखिम अभी कम बना हुआ है।
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यह बयान ऐसे समय में आया है, जब निपाह वायरस की उच्च मृत्यु दर को देखते हुए कई एशियाई देशों ने प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों की स्वास्थ्य जांच को और कड़ा कर दिया है। WHO ने अपने आधिकारिक मंच पर कहा कि भारत में सामने आए हालिया मामलों में संक्रमित मरीज जिले के भीतर ही रहे और उन्होंने अन्य क्षेत्रों की यात्रा नहीं की, जिससे वायरस के फैलाव की संभावना और कम हो जाती है।
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स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, दोनों संक्रमित मरीजों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, मेडिकल स्क्रीनिंग और स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।
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गौरतलब है कि यह भारत में निपाह वायरस का सातवां रिपोर्ट किया गया मामला है, जबकि पश्चिम बंगाल में यह तीसरा मामला है। इससे पहले वर्ष 2001 में सिलीगुड़ी और 2007 में नादिया जिले में निपाह वायरस के मामले सामने आए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि सतर्कता और समय पर कार्रवाई से स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सकता है।

















