बजट 2026 की बिसात: किसके हिस्से राहत, किस पर बढ़ा बोझ ?

नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित
(Union Budget 2026: Who Gains and Who Loses?)केंद्रीय बजट 2026 एक बार फिर देश की अर्थव्यवस्था के अलग-अलग वर्गों—करदाता, निवेशक, उपभोक्ता और व्यापारी—के लिए फायदे और नुकसान का संतुलित चित्र पेश करता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश इस बजट का फोकस विकास, स्थिरता और सुधार के बीच संतुलन साधने पर रहा है। सरकार ने बड़े कर राहत पैकेज देने के बजाय कर प्रक्रियाओं को सरल बनाने और अनुपालन को आसान करने पर जोर दिया है।

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करदाताओं के लिए आयकर रिटर्न संशोधन की समय-सीमा बढ़ाना, छोटे अपराधों को अपराधमुक्त करना और दंड प्रणाली को तर्कसंगत बनाना राहत भरे कदम हैं। वहीं, न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) को 15% से घटाकर 14% करना और इसे अंतिम कर मानना उद्योग जगत के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि 1 अप्रैल 2026 के बाद नया MAT क्रेडिट न मिलना कुछ कंपनियों के लिए चुनौती बन सकता है।

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निवेशकों को बजट में अधिक स्पष्ट और उदार ढांचा मिला है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) की सीमा बढ़ाने से विदेशी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। IFSC और ऑफशोर बैंकिंग यूनिट्स के लिए टैक्स डिडक्शन की अवधि बढ़ाना शिपिंग और अंतरराष्ट्रीय वित्त को मजबूती देगा। लेकिन डेरिवेटिव्स पर STT बढ़ाने और ब्याज खर्च पर कटौती न मिलने से बाजार से जुड़े निवेशकों को सतर्क रहना होगा।

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उपभोक्ताओं के लिए 17 जीवनरक्षक दवाओं और दुर्लभ बीमारियों के विशेष खाद्य पदार्थों पर कस्टम ड्यूटी हटाना बड़ी राहत है। कुछ इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स पर ड्यूटी घटाने से कीमतों में नरमी की उम्मीद है, हालांकि रोजमर्रा और डिजिटल वस्तुओं पर सीमित रियायत निराश कर सकती है।

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व्यापारियों के लिए कस्टम प्रक्रिया को सरल बनाना, कैपिटल गुड्स पर ड्यूटी छूट और निर्यातोन्मुख क्षेत्रों को प्रोत्साहन देना सकारात्मक कदम हैं। कुल मिलाकर बजट 2026 सुधारों और अनुशासन के जरिए दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता की दिशा में बढ़ता हुआ कदम माना जा रहा है।

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