चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(Punjab High Court Stays Municipal Elections)पंजाब में शहरी निकाय चुनावों को लेकर पंजाब सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य के 9 नगर निगमों और 100 से अधिक नगर पालिकाओं के चुनाव की अधिसूचना जारी करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक वार्डबंदी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सरकार अपना जवाब दाखिल नहीं करती, तब तक चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकती।
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हाईकोर्ट के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि वार्डबंदी के खिलाफ दायर कई याचिकाओं पर पहले ही नोटिस जारी हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकार की ओर से अब तक कोई जवाब पेश नहीं किया गया। इस पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे न्यायिक प्रक्रिया की अवहेलना के समान बताया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना जवाब दाखिल किए चुनावों की अधिसूचना जारी करना स्वीकार्य नहीं है।
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याचिकाकर्ताओं ने नई वार्डबंदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि परिसीमन प्रक्रिया में मनमानी की गई है और इसमें राजनीतिक पक्षपात साफ नजर आता है। इसके साथ ही जनसंख्या संतुलन और समान प्रतिनिधित्व जैसे संवैधानिक पहलुओं की अनदेखी किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। इन्हीं आरोपों को लेकर एक के बाद एक याचिकाएं दाखिल की गईं, जिनकी संख्या अब दर्जनों में पहुंच चुकी है।
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हाईकोर्ट में जिन नगर निगमों की वार्डबंदी को चुनौती दी गई है, उनमें बटाला, पठानकोट, कपूरथला, होशियारपुर, मोहाली, बठिंडा, अबोहर, मोगा और बरनाला शामिल हैं। इसके अलावा राज्य की 100 से अधिक म्युनिसिपल कमेटियां भी इस आदेश के दायरे में आ गई हैं। इन सभी के चुनाव की अधिसूचना पर अगली सुनवाई, 18 फरवरी तक रोक लगा दी गई है।
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हाईकोर्ट के इस फैसले से पंजाब सरकार की चुनावी टाइमलाइन पर संकट खड़ा हो गया है। प्रशासनिक तैयारियां पूरी होने के बावजूद अब अदालत की अनुमति के बिना चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकेगी। फिलहाल पूरे पंजाब में शहरी निकाय चुनावों पर न्यायिक ब्रेक लगा हुआ है, जिसे राजनीतिक और संवैधानिक दृष्टि से बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।

















