सावधान! कहीं आपके बच्चे तो नहीं खेल रहे ‘मौत का गेम’?

नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित
(Deadly Challenge Behind Shocking Deaths)डिजिटल युग में जहां तकनीक ने जीवन को आसान बनाया है, वहीं इसके अंधेरे पहलू अब समाज के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। गाजियाबाद की हालिया घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है, जहां तीन नाबालिग बहनों ने 9वीं मंज़िल से कूदकर आत्महत्या कर ली। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह दर्दनाक कदम कथित तौर पर एक खतरनाक ऑनलाइन गेमिंग नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है, जो बच्चों को मानसिक रूप से नियंत्रित कर लेता है।

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विशेषज्ञों के अनुसार, इन गेम्स का ढांचा कुख्यात ‘ब्लू व्हेल चैलेंज’ जैसा है। शुरुआत में बच्चों को बेहद आसान और सामान्य टास्क दिए जाते हैं, जैसे देर रात तक जागना, खास तरह का संगीत सुनना या छोटे-छोटे प्रतीक बनाना। इन टास्क को पूरा करने पर बच्चों के दिमाग में डोपामिन रिलीज होता है, जिससे उन्हें जीत और संतुष्टि का भ्रम होने लगता है। धीरे-धीरे यह खेल बच्चों की सोच और भावनाओं पर पूरी तरह हावी हो जाता है।

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जांच में यह भी सामने आया है कि गेम के ‘एडमिन’ बच्चों को निजी ग्रुप्स में जोड़ते हैं और उन्हें यह एहसास कराते हैं कि वे किसी विशेष मिशन का हिस्सा हैं। इसके बाद ‘गैसलाइटिंग’ जैसी मनोवैज्ञानिक तकनीकों के जरिए उन्हें डराया जाता है—यहां तक कि माता-पिता को नुकसान पहुंचाने की धमकी भी दी जाती है। इस मानसिक दबाव में बच्चा गेम के हर आदेश को अंतिम सत्य मानने लगता है।

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गौरतलब है कि वर्ष 2017 में ब्लू व्हेल गेम ने वैश्विक स्तर पर दहशत फैला दी थी। अब कोरियन ड्रामा और ऑनलाइन गेम्स की लोकप्रियता का फायदा उठाकर साइबर अपराधी इन्हें नए रूप में वापस ला रहे हैं। ये गेम्स अक्सर प्ले-स्टोर के बजाय थर्ड-पार्टी लिंक के माध्यम से डाउनलोड कराए जाते हैं, ताकि सरकारी निगरानी से बचा जा सके।

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यह घटना न सिर्फ अभिभावकों बल्कि प्रशासन और समाज के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है कि बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर सतर्क निगरानी अब समय की सबसे बड़ी ज़रूरत बन चुकी है।

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