नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित
(807 Missing in a Month: Alarming Rise in Disappearances in Delhi)देश की राजधानी दिल्ली में साल 2026 की शुरुआत एक भयावह तस्वीर के साथ हुई है। महज एक महीने से भी कम समय में दिल्ली से 807 लोग लापता हो चुके हैं, जिनमें महिलाओं और बच्चों की संख्या सबसे अधिक है। यह आंकड़ा न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी खड़े करता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में हर दिन औसतन 27 लोग रहस्यमयी ढंग से गायब हो रहे हैं।
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हालांकि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां प्रतिदिन करीब 9 लोगों को खोजने में सफल हो रही हैं, लेकिन इसके बावजूद 538 लोग अब भी लापता हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि लापता लोगों में नाबालिग लड़कियों और किशोरियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 12 से 18 वर्ष की उम्र की बच्चियों के गायब होने के मामले समाज के लिए गंभीर चेतावनी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन मामलों के पीछे मानव तस्करी, अपहरण और संगठित अपराध की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
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जनवरी के शुरुआती 27 दिनों में ही 191 नाबालिग बच्चे लापता हुए, जिनमें से 137 का अब तक कोई सुराग नहीं मिला। वहीं वयस्कों की बात करें तो 616 वयस्कों की गुमशुदगी दर्ज की गई, जिनमें से 435 अब भी लापता हैं।
पिछले 11 वर्षों के आंकड़े हालात को और भयावह बना देते हैं। 2016 से 2026 के बीच 60,000 से अधिक बच्चे लापता हुए, जिनमें से करीब 7,000 आज तक नहीं मिले। सवाल अब यही है कि आधुनिक तकनीक और व्यापक नेटवर्क के बावजूद, आखिर ये लोग और मासूम बच्चे कहां गायब हो जाते हैं? यह संकट अब केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा और संवेदनशीलता की परीक्षा बन चुका है।

















