नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित
(TN Warns of Pay Cut as Nationwide Strike Looms)केंद्र सरकार द्वारा लागू चार श्रम संहिताओं के खिलाफ 12 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के देशव्यापी हड़ताल के आह्वान ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। गुरुवार को प्रस्तावित इस हड़ताल से बैंकिंग, परिवहन और अन्य सार्वजनिक सेवाओं पर व्यापक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। कई राज्यों में सरकारी दफ्तर, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, बाजार और यातायात सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। भारतीय मजदूर संघ (BMS), INTUC, AITUC, HMS, CITU समेत 12 प्रमुख संगठनों और किसान यूनियनों ने इस हड़ताल को समर्थन दिया है।
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ट्रेड यूनियनों का आरोप है कि वेज कोड 2019, इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड 2020, सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां कोड 2020 के जरिए 29 पुराने श्रम कानूनों को समाहित कर श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर किया गया है। उनका कहना है कि इन प्रावधानों से नौकरी की सुरक्षा घटी है और नियोक्ताओं को भर्ती व छंटनी में अधिक छूट मिली है। निजीकरण और वेतन सुरक्षा जैसे मुद्दे भी आंदोलन के केंद्र में हैं। बैंक यूनियनों—AIBEA, AIBOA और BEFI—के समर्थन से बैंकिंग सेवाओं पर असर की संभावना और बढ़ गई है।
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इधर तमिलनाडु सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि हड़ताल में शामिल होने वाले राज्य कर्मचारियों को उस दिन का वेतन नहीं मिलेगा और इसे अधिकृत अवकाश नहीं माना जाएगा। सरकार का तर्क है कि यह कदम सार्वजनिक सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। वहीं डीएमके और सहयोगी दलों ने हड़ताल को समर्थन देते हुए राज्यभर में विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। विपक्ष और यूनियनें श्रम कोड वापस लेने की मांग पर अडिग हैं।

















