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खास खबर: BBMB के फैसले पर AAP जाएगी केंद्र के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में !

चंडीगढ़ । राजवीर दीक्षित

(Breaking News: AAP will move the Supreme Court against the Centre over the BBMB decision!) आम आदमी पार्टी (AAP) ने बुधवार को केंद्र सरकार के उस फैसले का विरोध किया, जिसमें भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) के अहम पदों को अन्य राज्यों के अधिकारियों के लिए खोलने की बात कही गई है। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह राज्य के नदी जल पर नियंत्रण पाने की कोशिश है।

पार्टी की यह प्रतिक्रिया 13 अप्रैल को केंद्र द्वारा जारी अधिसूचना के बाद आई है, जिसमें BBMB नियम, 1974 में संशोधन किया गया।
इस संशोधन में सदस्य (पावर) और सदस्य (सिंचाई) के पदों के लिए पात्रता मानदंड बदले गए हैं, जिससे राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के अधिकारियों को भी विचार के लिए शामिल किया जा सके। राज्य सरकार ने पहले ही इस कदम पर आपत्ति जताई थी।

द टारगेट न्यूज ने सबसे पहले इन दो पदों के लिए पात्रता में बदलाव की खबर प्रकाशित की थी।
AAP के मुख्य प्रवक्ता बलतेज सिंह पन्नू ने कहा कि पंजाब सरकार इस फैसले को अदालत में चुनौती देगी। उन्होंने कहा, “भगवंत मान सरकार इस कदम के खिलाफ हर स्तर पर लड़ेगी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट भी शामिल है, ताकि पंजाब के अधिकारों की रक्षा की जा सके।”
हर स्तर पर लड़ाई होगी

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 79(2)(a) में संशोधन कर BBMB में स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार कर रही है, जिसमें राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के प्रतिनिधियों को शामिल किया जा सकता है। इस पर केंद्र के ऊर्जा मंत्रालय ने राज्यों से राय मांगी थी, जिसका पंजाब ने विरोध किया।

12 फरवरी को ऊर्जा मंत्रालय को लिखे पत्र में पंजाब सरकार ने प्रस्तावित नियुक्तियों पर आपत्ति जताई थी। राज्य ने कहा कि अधिनियम की धारा 78 और 79 पहले ही सुप्रीम कोर्ट में एक सिविल याचिका के जरिए चुनौती के अधीन हैं, इसलिए फैसले से पहले कोई संशोधन नहीं किया जाना चाहिए।

पंजाब ने यह भी कहा कि राजस्थान उत्तराधिकारी राज्य नहीं है, इसलिए उसे BBMB में प्रतिनिधित्व का अधिकार नहीं है। साथ ही, हिमाचल और राजस्थान के अधिकारी पहले से ही एक्स-ऑफिशियो सदस्य के रूप में बैठकों में शामिल होते हैं।

राज्य ने यह भी तर्क दिया कि वह BBMB के खर्च का 40% और भाखड़ा परियोजना की लागत का 60% वहन करता है, इसलिए नए सदस्यों को जोड़ने से उस पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। साथ ही, मौजूदा सदस्य बोर्ड के कामकाज के लिए पर्याप्त हैं।

इससे पहले, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 23 अक्टूबर 2025 को केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर यह मुद्दा उठाया था और नवंबर में हुई नॉर्थ ज़ोनल काउंसिल की बैठक में भी राज्य का विरोध दोहराया था।

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