शिमला की सड़कों पर वाहनों का बढ़ता दबाव: हाईकोर्ट ने जताई चिंता
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में वाहनों की बढ़ती संख्या और प्रतिबंधित सड़कों पर धड़ल्ले से दौड़ते वाहनों को लेकर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि समय रहते ‘सील्ड’ और ‘प्रतिबंधित’ सड़कों पर वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित नहीं किया गया, तो शिमला का ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्वरूप पूरी तरह नष्ट हो जाएगा।
मामले का पूरा विवरण
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि शहर की उन सड़कों पर भी वाहनों का भारी दबाव है, जिन्हें पर्यावरण और सुरक्षा कारणों से आम वाहनों के लिए बंद रखा गया था। इन सड़कों पर विशेष पास जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और नियमों की अनदेखी पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। टारगेट न्यूज़ की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ‘वीआईपी कल्चर’ या प्रशासनिक सुविधा के नाम पर शहर के पर्यावरण के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि शिमला की सड़कों की वहन क्षमता पहले ही समाप्त हो चुकी है। यदि प्रतिबंधित क्षेत्रों में वाहनों का प्रवेश इसी तरह जारी रहा, तो भविष्य में यह शहर पर्यटकों के लिए नहीं, बल्कि केवल कंक्रीट के जंगल के रूप में जाना जाएगा।
मुख्य बिंदु और प्रभाव
- प्रतिबंधित सड़कों पर जारी किए जा रहे वाहनों के पास की गहन समीक्षा के निर्देश।
- शहर के हेरिटेज जोन को बचाने के लिए सख्त यातायात प्रबंधन नीति की आवश्यकता।
- अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का आदेश कि केवल आपातकालीन सेवाओं को ही विशेष अनुमति मिले।
- पर्यटन सीजन के दौरान शहर में वाहनों के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए वैकल्पिक पार्किंग और शटल सेवा पर जोर।
कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करे जिसमें यह स्पष्ट हो कि अब तक कितने पास जारी किए गए हैं और किन आधारों पर ये अनुमति दी गई है। टारगेट न्यूज़ के अनुसार, इस मामले में अगली सुनवाई जल्द ही निर्धारित की गई है, जिसमें प्रशासन को अपनी कार्ययोजना पेश करनी होगी।



















