शिमला । राजवीर दीक्षित
हिमाचल प्रदेश में एंट्री टैक्स/टोल बैरियर को लेकर चल रहे जमीनी आंदोलन और कानूनी लड़ाई के बीच राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष मौजूदा एंट्री टोल बैरियर को दूसरी जगह स्थानांतरित करने और नई व्यवस्था स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट में दाखिल कंप्लायंस एफिडेविट में चंडीगढ़-शिमला नेशनल हाईवे पर परवाणू के टिपरा बाईपास स्थित मौजूदा एंट्री टोल बैरियर को आगे किसी नई जगह पर शिफ्ट करने का प्रस्ताव दिया है। प्रस्ताव में अलग-अलग लेन बनाने और नई व्यवस्था के लिए करोड़ों रुपये का बजट निर्धारित करने की बात भी कही गई है।
पंजाब मोर्चा के संयोजक गौरव राणा ने कहा कि उनके अभियान का उद्देश्य पूरे हिमाचल प्रदेश में एंट्री टोल बैरियर को समाप्त करवाना है। उन्होंने कहा कि जमीनी आंदोलन के साथ-साथ कानूनी लड़ाई भी जारी रहेगी।
राणा ने कहा कि केवल टोल बैरियर को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करने से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा, क्योंकि यह उनकी मुख्य मांग भी नहीं है।
उन्होंने कहा कि चंडीगढ़-शिमला मार्ग नेशनल हाईवे-5 है। उनके अनुसार, मामले में मुख्य कानूनी और संवैधानिक सवाल यह है कि नेशनल हाईवे की जमीन पर राज्य के बाहर से आने वाले लोगों से एंट्री टोल वसूलना कानूनी रूप से कितना वैध है। उन्होंने कहा कि केवल बैरियर की जगह बदलने से मूल विवाद का समाधान नहीं होगा।
कानूनी सलाहकार एडवोकेट उत्तांश मोंगा ने बताया कि हिमाचल सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष कंप्लायंस एफिडेविट दाखिल किया है। उनके मुताबिक, सरकार ने टिपरा बाईपास स्थित मौजूदा एंट्री टोल बैरियर पर चार ऑपरेशनल लेन और एक लेन छूट प्राप्त वाहनों के लिए होने का उल्लेख किया है और इस सुविधा को आगे नई जगह पर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा है।
एफिडेविट में टिप्परा में इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP) स्थापित करने का प्रस्ताव भी बताया गया है। इसके लिए करीब 13 करोड़ रुपये की राशि मंजूर होने की बात कही गई है। दस्तावेज में लगभग 3.365 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध होने का भी उल्लेख है। प्रस्तावित नई व्यवस्था में कुल पांच टोल लेन बनाने की बात कही गई है।
यह मामला उत्तांश मोंगा बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार एवं अन्य से संबंधित है। याचिका में राज्य सरकार द्वारा एंट्री टोल लगाने की संवैधानिक और कानूनी वैधता को चुनौती दी गई है। इस मामले में हाईकोर्ट का अंतिम फैसला अभी आना बाकी है।
गौरव राणा ने कहा कि यह मुद्दा केवल परवाणू तक सीमित नहीं रहेगा। हिमाचल प्रदेश में संचालित अन्य एंट्री टोल बैरियरों को भी इस अभियान के दायरे में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य में प्रवेश करने वाले लोगों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को खत्म करने की मांग को लेकर संघर्ष जारी रहेगा।



















