टारगेट न्यूज़ ग्राउंड रिपोर्ट: हॉलीवुड के दिग्गज और एक्शन फिल्मों के पर्याय बन चुके अभिनेता सिल्वेस्टर स्टालोन ने अपने जीवन और करियर के एक बेहद डार्क और संवेदनशील पहलू से पर्दा उठाया है। उन्होंने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान स्वीकार किया कि वे लंबे समय तक गंभीर एंग्जायटी यानी चिंता और ईटिंग डिसऑर्डर ‘बुलिमिया’ जैसी समस्याओं से जूझते रहे हैं। स्टालोन के अनुसार, उनके जीवन में इस मानसिक और शारीरिक संघर्ष की शुरुआत तब हुई जब वे महज 36 वर्ष के थे और अपने करियर के चरम पर पहुंच रहे थे। दुनिया भर में अपनी मस्कुलर बॉडी और बेखौफ एक्शन अवतार के लिए पहचाने जाने वाले इस अभिनेता के इस खुलासे ने उनके प्रशंसकों और पूरी फिल्म इंडस्ट्री को हैरान कर दिया है।
ग्राउंड से मुख्य जानकारी (Key Takeaways)
- सिल्वेस्टर स्टालोन ने 36 वर्ष की उम्र से गंभीर एंग्जायटी और भीड़भाड़ वाली जगहों पर पैनिक अटैक आने की बात स्वीकार की है।
- सुपरहिट फिल्म ‘रैम्बो’ और ‘रॉकी 3’ की शूटिंग के दौरान वे शारीरिक फिटनेस के प्रति इस हद तक जुनूनी हो गए थे कि उन्हें ‘बुलिमिया’ (खाने से जुड़ा विकार) हो गया था।
- फिल्म ‘रॉकी 3’ की शूटिंग के समय उनका बॉडी फैट खतरनाक रूप से बहुत कम स्तर तक गिर गया था, जिसका असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ा था।
- हालिया साक्षात्कारों में स्टालोन ने यह भी आशंका जताई है कि आज के आधुनिक और प्रतिस्पर्धी हॉलीवुड माहौल में उनके जैसा अभिनेता शायद ही सफल हो पाता।
घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा (Chronological Event Breakdown)
सिल्वेस्टर स्टालोन के करियर की नींव रखने वाली फिल्म ‘रॉकी’ (1976) ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया था। इस फिल्म की सफलता ने उन्हें असीम लोकप्रियता दिलाई, लेकिन इसके साथ ही उनके कंधों पर खुद को साबित करने का भारी दबाव भी आ गया। स्टालोन ने साझा किया कि जब वे 36 वर्ष के थे, तब उन्हें पहली बार गंभीर एंग्जायटी के दौरे पड़े। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर शूटिंग करते समय उन्हें ऐसा महसूस होता था कि उनका दम घुट रहा है और वे अब इस दुनिया में नहीं बचेंगे। ऐसे मौकों पर उनके मन में अक्सर नकारात्मक विचार आते थे कि ‘अब सब खत्म होने वाला है और मैं मरने वाला हूँ।’
यह मानसिक संघर्ष तब और गहरा गया जब उन्होंने ‘रैम्बो’ और ‘रॉकी’ श्रृंखला की अगली फिल्मों के लिए खुद को शारीरिक रूप से ढालना शुरू किया। ‘रॉकी 3’ की शूटिंग के दौरान उनका फिटनेस को लेकर जुनूनी रवैया इस हद तक बढ़ गया कि उन्होंने बेहद कम कैलोरी वाला आहार लेना शुरू कर दिया। इस दौरान उनका शरीर अत्यधिक कमजोर होने लगा और वे ‘बुलिमिया’ का शिकार हो गए। फिल्म के सेट पर वे अक्सर चक्कर खाकर गिर जाते थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपनी फिटनेस के मानकों से कभी समझौता नहीं किया। उनके इस समर्पण ने परदे पर तो जादुई असर दिखाया, लेकिन परदे के पीछे उनका शरीर और दिमाग अंदर से टूटने लगा था।
प्रशासनिक व स्थानीय प्रतिक्रिया (Official Action & Public Reaction)
सिल्वेस्टर स्टालोन के इस खुलासे के बाद हॉलीवुड के मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और उनके सह-कलाकारों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। कई फिटनेस एक्सपर्ट्स का मानना है कि 1980 और 90 के दशक में अभिनेताओं पर अत्यधिक मस्कुलर दिखने का जो मानसिक दबाव होता था, वह कई मानसिक और शारीरिक बीमारियों को जन्म देता था। सोशल मीडिया पर उनके फैंस लगातार समर्थन जता रहे हैं और उनके इस साहसिक कदम की सराहना कर रहे हैं कि उन्होंने अपनी कमजोरी को खुलकर दुनिया के सामने रखा है।
सिल्वेस्टर स्टालोन ने अपने एक बयान में कहा, जब आप कैमरे के सामने होते हैं और हर कोई आपसे एक सुपरहीरो की तरह दिखने की उम्मीद करता है, तो आप अपने अंदर चल रहे तूफान को किसी से कह नहीं पाते। ‘रॉकी’ और ‘रैम्बो’ के दिनों में मेरा शरीर और मेरा दिमाग दोनों ही चरम सीमा पर काम कर रहे थे। मुझे कई बार लगा कि मैं यह सब सहन नहीं कर पाऊंगा।
आगे क्या? (What Lies Ahead)
सिल्वेस्टर स्टालोन द्वारा अपनी मानसिक स्वास्थ्य की लड़ाई को सार्वजनिक करना वर्तमान समय में एक बहुत बड़ा संदेश देता है। यह इस बात का प्रमाण है कि चमक-धमक और सफलता के पीछे छिपी दुनिया कितनी संघर्षपूर्ण हो सकती है। आने वाले समय में, स्टालोन अपने इस अनुभव का उपयोग युवा कलाकारों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए कर सकते हैं। आज के दौर में जब हॉलीवुड और बॉलीवुड दोनों ही इंडस्ट्रीज में मेंटल हेल्थ पर खुलकर बात होने लगी है, स्टालोन का यह बयान एक मील का पत्थर साबित होगा, जो यह सिखाता है कि शारीरिक ताकत के साथ-साथ मानसिक शांति और संतुलन बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।



















