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ब्रिटेन की राजनीति में ब्रेक्जिट पर फिर गरमाई सियासत, यूरोपीय यूनियन में वापसी की उठी मांग

ब्रिटेन की राजनीति में ब्रेक्जिट पर फिर गरमाई सियासत, यूरोपीय यूनियन में वापसी की उठी मांग

टारगेट न्यूज़ ग्राउंड रिपोर्ट: ब्रिटेन की राजनीति में एक बार फिर से ‘ब्रेक्जिट’ (Brexit) का मुद्दा गर्मा गया है और इस बार मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहैम ने यूरोपीय यूनियन (EU) में ब्रिटेन की दोबारा वापसी की वकालत करके नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे दिया है। एंडी बर्नहैम के इस ताजा बयान ने देश भर में एक तीखी बहस छेड़ दी है, जिसमें आर्थिक और कूटनीतिक मोर्चे पर ब्रेक्जिट के परिणामों का नए सिरे से विश्लेषण किया जा रहा है। जानकारों का मानना है कि लेबर पार्टी के भीतर और बाहर इस बयान के दूरगामी राजनीतिक परिणाम देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि ब्रेक्जिट को लेकर पहले ही जनता और राजनेताओं के बीच गहरी वैचारिक खाई बनी हुई है।

ग्राउंड से मुख्य जानकारी (Key Takeaways)

  • मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहैम ने ब्रेक्जिट को देश के लिए ‘फायदे से ज्यादा नुकसानदायक’ करार दिया है।
  • बर्नहैम ने ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन में दोबारा शामिल होने के विकल्पों पर विचार करने की मांग उठाई है।
  • यह बयान ऐसे समय आया है जब ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था मुद्रास्फीति और सप्लाई चेन संकट से जूझ रही है।
  • लेबर पार्टी के भीतर इस मांग को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, कुछ इसे राजनीतिक जोखिम मान रहे हैं।

घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा (Chronological Event Breakdown)

साल 2016 में हुए जनमत संग्रह के बाद से ही ब्रिटेन में यूरोपीय यूनियन से अलग होने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, जिसे औपचारिक रूप से ब्रेक्जिट कहा गया। वर्षों की लंबी बातचीत और राजनीतिक उथल-पुथल के बाद ब्रिटेन आखिरकार ईयू से बाहर हो गया। हालांकि, शुरुआती दौर से ही इसके आर्थिक दुष्परिणाम दिखने लगे थे। व्यापारिक बाधाएं खड़ी हुईं, वीजा नियमों में कड़ाई आई और लेबर मार्केट में श्रमिकों की भारी कमी दर्ज की गई। हाल ही में एक सार्वजनिक मंच पर बोलते हुए एंडी बर्नहैम ने इन सभी बिंदुओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ब्रेक्जिट ने देश को मजबूत करने के बजाय वैश्विक मंच पर कमजोर किया है और अब समय आ गया है कि बिना किसी पूर्वाग्रह के इसके आर्थिक नुकसानों का मूल्यांकन किया जाए। बर्नहैम के इस बयान के तुरंत बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों के साथ-साथ सत्तारूढ़ खेमे में भी इस पर मंथन शुरू हो गया है कि क्या ब्रिटेन भविष्य में एक बार फिर से यूरोपीय यूनियन के साथ अपने संबंधों को सुधारने या पुनः जुड़ने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है।

प्रशासनिक व स्थानीय प्रतिक्रिया (Official Action & Public Reaction)

स्थानीय व्यापारिक संगठनों और आम जनता के एक बड़े वर्ग ने बर्नहैम के इस बयान का स्वागत किया है। उनका तर्क है कि यूरोपीय यूनियन से हटने के बाद से आयात-निर्यात पर भारी टैक्स और कागजी कार्रवाई का बोझ बढ़ा है, जिससे छोटे व्यवसायों का टिकना मुश्किल हो गया है। दूसरी ओर, ब्रेक्जिट के पैरोकार राजनेताओं ने इस मांग का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि जनमत संग्रह के जनादेश का सम्मान होना चाहिए और ब्रिटेन को अपनी संप्रभुता के साथ किसी भी समझौते से बचना चाहिए।

एंडी बर्नहैम ने कहा, हमें यह स्वीकार करने में संकोच नहीं करना चाहिए कि ब्रेक्जिट ने हमारी अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय साख को उम्मीद से कहीं अधिक नुकसान पहुंचाया है। यदि देश के दीर्घकालिक हितों की रक्षा करनी है, तो हमें ईयू के साथ संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करना होगा।

आगे क्या? (What Lies Ahead)

आने वाले महीनों में इस मुद्दे के ब्रिटिश राजनीति के केंद्र में बने रहने की पूरी संभावना है। जैसे-जैसे आम चुनाव नजदीक आ रहे हैं, राजनीतिक दल इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि ब्रेक्जिट के मुद्दे को किस तरह से अपने पक्ष में भुनाया जाए। एंडी बर्नहैम की इस टिप्पणी ने भले ही अभी किसी औपचारिक सरकारी नीति का रूप नहीं लिया है, लेकिन इसने देश के नीति निर्माताओं को इस बात पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है कि क्या ब्रिटेन का भविष्य यूरोप से अलग रहकर सुरक्षित है या फिर उसे एक दिन फिर से ईयू के दरवाजे पर दस्तक देनी होगी।

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