जालंधर/फगवाड़ा। राजवीर दीक्षित
(3 arrested in LPU violence! Identification through digital evidence, 3 days police remand) लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में 26 सितंबर की रात छात्रा से कथित रेप की सोशल मीडिया पर फैली सूचना के बाद हुई हिंसा और तोड़फोड़ के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई। तीनों को फगवाड़ा अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गगन, जेम्स दहिया और अभि के रूप में हुई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जेम्स दहिया LPU का छात्र है, जबकि गगन फगवाड़ा में डिलीवरी का काम करता था। पुलिस रिमांड के दौरान तीनों से हिंसा और यूनिवर्सिटी परिसर में हुई तोड़फोड़ में उनकी कथित भूमिका को लेकर पूछताछ की जाएगी। पुलिस ने फिलहाल जांच से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
परिजन बोले- गिरफ्तारी की वजह नहीं बताई
गगन के मामा के अनुसार, परिवार को उसकी गिरफ्तारी के कारण की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। उनका दावा है कि गगन पिछले दिन से लापता था और कोर्ट में पेशी से पहले उसने फोन कर परिजनों को सूचना दी। परिवार ने बताया कि गगन करीब डेढ़ महीने पहले ही डिलीवरी की नौकरी पर लगा था।
रेप की सूचना के बाद भड़की थी हिंसा
26 सितंबर की रात सोशल मीडिया पर LPU हॉस्टल में छात्रा के साथ कथित रेप की सूचना तेजी से फैली। हालांकि, इस दावे की पुष्टि नहीं हुई है। LPU प्रशासन ने आरोपों को गलत और निराधार बताया है, जबकि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भी पुलिस से रिपोर्ट मांगी है कि सोशल मीडिया पर किए गए दावे के मुताबिक वास्तव में कोई घटना हुई थी या नहीं। अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होनी है।
सूचना फैलने के बाद बड़ी संख्या में छात्र प्रदर्शन पर उतर आए। हालात बिगड़ने पर यूनिवर्सिटी परिसर में तोड़फोड़, आगजनी और दुकानों में नुकसान की घटनाएं सामने आईं। NH-44 पर भी 18 घंटे से अधिक समय तक यातायात प्रभावित रहा। पुलिस ने हिंसा से जुड़े मामलों में FIR दर्ज कर जांच के लिए SIT गठित की है।
फर्जी वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट भी जांच के घेरे में
हिंसा के दौरान सोशल मीडिया पर कई दावे और वीडियो वायरल हुए। इनमें से एक वीडियो में पुलिस अधिकारी के हवाले से LPU मामले के आरोपी को राजनीतिक व्यक्ति से जोड़ने का दावा किया गया था, जिसे फैक्ट-चेक में डीपफेक पाया गया।
अब पुलिस CCTV फुटेज, डिजिटल साक्ष्यों और सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री की जांच कर रही है। हाईकोर्ट ने भी पंजाब पुलिस से हिंसा की पूरी स्थिति और कथित घटना की वास्तविकता को लेकर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।
फिलहाल तीन गिरफ्तारियों के बाद पुलिस जांच आगे बढ़ रही है और रिमांड के दौरान आरोपियों की कथित भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है।

















