शिमला । राजवीर दीक्षित
(Ration crisis during the festive season! Sugar to cost more at Himachal depots; supply of oil and pulses stalled) त्योहारी सीजन शुरू होते ही हिमाचल प्रदेश के राशन उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी पीडीएस के तहत मिलने वाली जरूरी खाद्य वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी गोदामों में उड़द की दाल और सरसों के तेल का स्टॉक खत्म होने के कारण इनकी सप्लाई उचित मूल्य की दुकानों यानी राशन डिपो तक नहीं पहुंच पा रही है।
एक तरफ त्योहारों की तैयारी, दूसरी तरफ राशन की किल्लत ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है।
वहीं, एपीएल टैक्सपेयर परिवारों के लिए चीनी भी अब पहले से महंगी हो गई है। पहले इन परिवारों को चीनी 48 रुपये प्रति किलो की दर से मिलती थी, लेकिन अब उन्हें इसके लिए 52 रुपये प्रति किलो चुकाने होंगे। यानी चीनी की कीमत में सीधे 4 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है।
चीनी के दाम में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब त्योहारी सीजन में इसकी खपत काफी बढ़ जाती है। घरों में मिठाइयां बनाने से लेकर अलग-अलग तरह के पकवान तैयार करने तक, त्योहारों के दौरान चीनी की मांग सामान्य दिनों के मुकाबले ज्यादा रहती है। ऐसे में बढ़ी हुई कीमत का सीधा असर एपीएल टैक्सपेयर परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ना तय है।
त्योहारों पर खर्च पहले ही बढ़ता है, अब राशन की बढ़ी कीमतें परिवारों की जेब पर एक और बोझ डाल रही हैं।
उपभोक्ताओं का कहना है कि महंगाई के इस दौर में राशन की कीमतों में बढ़ोतरी उनके लिए परेशानी बढ़ाने वाली है। परिवारों के रोजमर्रा के खर्च पहले ही बढ़े हुए हैं और ऐसे में जरूरी खाद्य वस्तुओं के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।
दूसरी ओर, उड़द की दाल और सरसों का तेल सरकारी सप्लाई में उपलब्ध नहीं होने के कारण उचित मूल्य की दुकानों पर इनकी आपूर्ति प्रभावित हुई है। सरकारी डिपो में स्टॉक नहीं पहुंचने के कारण उपभोक्ताओं को इन वस्तुओं के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
सवाल अब सिर्फ राशन मिलने का नहीं, बल्कि यह भी है कि सरकारी सप्लाई आखिर कब तक बहाल होगी?
अगर जल्द ही उड़द की दाल और सरसों के तेल की सप्लाई बहाल नहीं हुई तो उपभोक्ताओं को मजबूरी में इन वस्तुओं की खरीदारी खुले बाजार से करनी पड़ सकती है। बाजार में इन खाद्य वस्तुओं की कीमत सरकारी राशन की तुलना में अधिक होने के कारण इसका सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ेगा।
यानी जिस राशन से लोगों को महंगाई के बीच कुछ राहत मिलनी चाहिए, उसकी सप्लाई प्रभावित होने पर उन्हें वही सामान बाजार से महंगे दामों पर खरीदना पड़ सकता है।
त्योहारी सीजन में पहले ही परिवारों का खर्च बढ़ जाता है। कपड़े, मिठाइयां, पूजा का सामान और घर के दूसरे जरूरी खर्चों के बीच राशन पर होने वाला अतिरिक्त खर्च परिवारों का बजट बिगाड़ सकता है।
एक तरफ चीनी के दाम बढ़े, दूसरी तरफ दाल और तेल की सप्लाई अटकी—त्योहारों से पहले राशन उपभोक्ताओं के सामने दोहरी परेशानी खड़ी हो गई है।
ऐसे में उपभोक्ताओं की नजर अब सरकारी सप्लाई पर टिकी है। लोगों को उम्मीद है कि उड़द की दाल और सरसों के तेल की आपूर्ति जल्द बहाल होगी, ताकि उन्हें जरूरी खाद्य वस्तुओं के लिए बाजार के महंगे दामों पर निर्भर न रहना पड़े।
फिलहाल, त्योहारी सीजन में राशन की कीमत और सप्लाई से जुड़ी यह स्थिति हिमाचल के उपभोक्ताओं के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। त्योहार खुशियों का मौसम है, लेकिन अगर जरूरी राशन के लिए भी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़े और सामान के लिए इंतजार करना पड़े, तो इन खुशियों का बजट जरूर बिगड़ सकता है।


















