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हरसिमरत कौर बादल ने सीएम भगवंत मान और डीजीपी के इस्तीफे की मांग की, ड्रग्स और पुलिस गठजोड़ पर उठाए गंभीर सवाल

हरसिमरत कौर बादल ने सीएम भगवंत मान और डीजीपी के इस्तीफे की मांग की, ड्रग्स और पुलिस गठजोड़ पर उठाए गंभीर सवाल

टारगेट न्यूज़ विशेष कवरेज: पंजाब की राजनीति में एक बार फिर से कानून व्यवस्था और नशा तस्करी के मुद्दों पर उबाल आ गया है। शिरोमणि अकाली दल की वरिष्ठ नेता और बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल ने गुरुवार को राज्य की आम आदमी पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री भगवंत मान और राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव के इस्तीफे की मांग की है। हरसिमरत कौर बादल का आरोप है कि राज्य सरकार न तो ड्रग्स के काले कारोबार पर लगाम कसने में सफल हो रही है और न ही उस कथित राजनेता-पुलिस गठजोड़ को तोड़ पा रही है जिसके कारण अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं। यह पूरा मामला मानसा में हुए एक युवा एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या और उससे जुड़े घटनाक्रम के बाद और भी ज्यादा तूल पकड़ गया है। पीड़ित परिवार और अकाली दल का आरोप है कि पुलिस प्रशासन इस मामले में लिप्त असली चेहरों को बचाने की कोशिश कर रहा है।

प्रमुख आकर्षण और बिंदु (Highlights)

  • शिरोमणि अकाली दल की वरिष्ठ नेता हरसिमरत कौर बादल ने सीएम भगवंत मान और डीजीपी गौरव यादव के इस्तीफे की मांग की।
  • बठिंडा सांसद ने मानसा में मारे गए एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा के परिवार की मांगों को पूरा करने में विफलता का आरोप लगाया।
  • मामले में सीबीआई जांच कराने और मानसा विधायक विजय सिंह के साथ-साथ डीएसपी, एसएसपी और ड्रग इंस्पेक्टर पर कार्रवाई की मांग उठाई गई।
  • वर्ष 2023 में गिरफ्तारी और कई छापों के बावजूद साल 2024 में अश्विनी कुमार को पिस्तौल का लाइसेंस मिलने पर गंभीर सवाल उठाए गए।

पूरे घटनाक्रम की कहानी (Full Story)

पंजाब में मादक पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़ी आपराधिक घटनाओं को लेकर राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर है। मानसा जिले में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले ने तूल पकड़ लिया है। परविंदर सिंह झोटा लंबे समय से इलाके में चल रहे अवैध नशे के कारोबार के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। उनकी हत्या के बाद से ही उनके परिवार और स्थानीय लोगों में गहरा रोष व्याप्त है। परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है और सरकार पर अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप लगा रहा है।

इसी सिलसिले में शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने एक तीखा बयान जारी करते हुए राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि मानसा के इस बहुचर्चित मामले में शहीद हुए एक्टिविस्ट के परिवार की किसी भी मांग को पूरा नहीं किया गया है। अकाली दल ने स्पष्ट किया है कि जब तक इस पूरे षड्यंत्र की निष्पक्ष जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से नहीं कराई जाती, तब तक सच्चाई सामने नहीं आएगी। हरसिमरत कौर बादल ने मानसा के स्थानीय विधायक विजय सिंगला, इलाके के डीएसपी, एसएसपी और संबंधित ड्रग इंस्पेक्टर की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

मामले में एक अन्य चौंकाने वाला खुलासा करते हुए उन्होंने सवाल किया कि जिस व्यक्ति (अश्विनी कुमार) के मेडिकल स्टोर पर कथित तौर पर बार-बार छापे पड़े और जिसे 2023 में गिरफ्तार भी किया गया था, उसे आखिर किस आधार पर 2024 में पिस्तौल का लाइसेंस जारी कर दिया गया। यह प्रशासनिक लापरवाही और अपराधियों तथा तंत्र के बीच सांठगांठ को स्पष्ट रूप से उजागर करती है। अकाली दल का कहना है कि पंजाब सरकार जनता की सुरक्षा करने और नशा तस्करों को नेस्तनाबूद करने के अपने चुनावी वादों को पूरी तरह भूल चुकी है और राज्य में जंगलराज कायम हो गया है.

मुख्य सवाल और उनके जवाब (Key Questions & Answers)

सवाल 1: हरसिमरत कौर बादल ने किन पदों पर बैठे लोगों के इस्तीफे की मांग की है?
जवाब: उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और डीजीपी गौरव यादव के इस्तीफे की मांग की है।

सवाल 2: अकाली दल इस मामले में किस एजेंसी से जांच की मांग कर रहा है?
जवाब: अकाली दल इस पूरे हत्याकांड और नशा तस्करी के गठजोड़ की सीबीआई जांच की मांग कर रहा है।

सवाल 3: किस मामले को लेकर यह पूरा विवाद खड़ा हुआ है?
जवाब: मानसा में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या और उनके परिवार की न्याय की मांग को लेकर यह विवाद खड़ा हुआ है।

पंजाब सरकार ड्रग्स के खात्मे के अपने बड़े-बड़े दावों में पूरी तरह विफल साबित हुई है। नशा तस्करों और भ्रष्ट पुलिस-राजनेता गठजोड़ को बचाया जा रहा है, और सच की आवाज उठाने वाले एक्टिविस्टों की हत्या हो रही है। जब तक मुख्यमंत्री और डीजीपी अपने पदों से इस्तीफा नहीं देते, तब तक न्याय की उम्मीद बेमानी है। – हरसिमरत कौर बादल, सांसद, बठिंडा

समापन और निष्कर्ष (Conclusion)

पंजाब की कानून व्यवस्था और नशा तस्करी का मुद्दा एक बार फिर से राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पटल पर गर्माता जा रहा है। परविंदर सिंह झोटा की हत्या और उस पर उपजा राजनीतिक विवाद यह साबित करता है कि राज्य में धरातल पर हालात कितने गंभीर हैं। विपक्षी दलों द्वारा लगातार उठाए जा रहे सवाल और सरकार पर लग रहे मिलीभगत के आरोप राज्य प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाते हैं। जब तक सरकार इन गंभीर आरोपों के पारदर्शी जवाब नहीं देती और निष्पक्ष जांच के जरिए जनता का भरोसा बहाल नहीं करती, तब तक पंजाब का राजनीतिक और सामाजिक तनाव कम होने का नाम नहीं लेगा।

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