टारगेट न्यूज़ विशेष कवरेज: पंजाब के मानसा जिले में शहीद हुए एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा के परिवार और एक्शन कमेटी के बीच तल्खियां बढ़ती जा रही हैं। इस बीच, परविंदर सिंह के पिता भीम सिंह ने सोमवार को एक बड़ा और स्पष्ट बयान देते हुए कहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आगामी दौरे के दौरान किसी भी प्रकार का विरोध प्रदर्शन उनके लिए व्यक्तिगत अपमान माना जाएगा। भीम सिंह ने जोर देकर कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि देश के गृह मंत्री उनके परिवार को न्याय दिलाने के लिए हरसंभव कदम उठाएंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति और स्थानीय स्तर पर चल रहे आंदोलनों में एक नया मोड़ ला दिया है, जहां एक तरफ न्याय की मांग तेज है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक दौरों को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं।
प्रमुख आकर्षण और बिंदु (Highlights)
- शहीद एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा के पिता भीम सिंह ने गृह मंत्री अमित शाह के दौरे का विरोध करने वालों को दो टूक जवाब दिया है।
- भीम सिंह ने स्पष्ट किया कि वह एक पूर्व सैनिक हैं और देश की सीमाओं की रक्षा कर चुके हैं, इसलिए शाह का स्वागत उनका व्यक्तिगत निर्णय है।
- परिवार लगातार इस मामले की जांच सीबीआई (CBI) से कराने की मांग पर अड़ा हुआ है, ताकि निष्पक्ष और समयबद्ध न्याय मिल सके।
- झोटा की हत्या के बाद गठित एक्शन कमेटी और परिवार के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद और आपसी तनातनी सामने आई है।
- स्थानीय अदालत में झोटा से जुड़े पुराने मामलों पर भी सुनवाई चल रही है, जिसमें परिवार ने त्वरित न्याय की गुहार लगाई है।
पूरे घटनाक्रम की कहानी (Full Story)
सोमवार को मीडिया से बातचीत करते हुए 72 वर्षीय पूर्व सैनिक भीम सिंह ने अपनी स्थिति और भावनाओं को पूरी बेबाकी से रखा। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा देश की सरहदों की हिफाजत में बिताया है और वह देश के संविधान तथा व्यवस्था का सम्मान करते हैं। भीम सिंह ने कहा, ‘मैं देश की सेवा कर चुका हूं और एक पेंशनभोगी पूर्व सैनिक हूं। यदि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी यहां आएंगे, तो मैं उनका भी स्वागत करूंगा। यदि कोई अमित शाह के दौरे का विरोध करता है, तो मैं इसे सीधे तौर पर अपना और मेरे बेटे झोटा के पार्थिव शरीर का अपमान मानूंगा।’ उनके इस बयान से उन तमाम राजनीतिक दलों और संगठनों को करारा झटका लगा है जो इस हाई-प्रोफाइल दौरे के विरोध की रणनीति बना रहे थे।
आप (AAP) सरकार और नेताओं पर निशाना साधते हुए भीम सिंह ने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेताओं को तब तक उनके घर आने की अनुमति नहीं है जब तक वे अपने पदों से इस्तीफा नहीं दे देते। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल ढिल्लों सहित अन्य सभी लोग उनके घर आ सकते हैं और उनका स्वागत है। दूसरी ओर, झोटा की हत्या के बाद न्याय के लिए बनाई गई एक्शन कमेटी ने रविवार रात को गृह मंत्री अमित शाह के दौरे का बहिष्कार करने का ऐलान किया था। कमेटी का आरोप था कि सत्तारूढ़ दल इस संवेदनशील मामले पर जनता के आक्रोश का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास कर रहा है। कमेटी ने यह भी कहा था कि वे परिवार से अनुरोध करेंगे कि वे शाह से मुलाकात न करें। हालांकि, सोमवार सुबह तक हालात बदलते दिखे जब कमेटी के एक सदस्य ने संकेत दिया कि वे परिवार के अमित शाह से मिलने के फैसले पर पुनर्विचार कर रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए भीम सिंह ने सीबीआई जांच की अपनी मांग को एक बार फिर पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि मामले की जांच स्थानीय पुलिस के पास ही रही, तो साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है या उन्हें नष्ट किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि केवल एक केंद्रीय एजेंसी ही इस पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश कर सकती है और उनके बेटे के हत्यारों को कानून के कटघरे में खड़ा कर सकती है। अपने संघर्ष का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उनके घर में कोई सोफा या वीआईपी सुविधाएं नहीं हैं, बल्कि कुछ टूटी हुई कुर्सियां ही हैं, जिस वजह से वह हर मिलने वाले से विरोध स्थल पर ही मुलाकात करते हैं। इसके साथ ही, झोटा और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज पुराने मामलों की सुनवाई को लेकर भी अदालत में प्रक्रिया जारी है, जिस पर भीम सिंह ने न्यायपालिका से अपील की है कि इन मामलों में भी जल्द से जल्द फैसला सुनाया जाए।
मुख्य सवाल और उनके जवाब (Key Questions & Answers)
सवाल 1: परविंदर सिंह झोटा के पिता अमित शाह के दौरे के विरोध के खिलाफ क्यों हैं?
जवाब: भीम सिंह एक पूर्व सैनिक हैं और उनका मानना है कि देश के गृह मंत्री का स्वागत करना उनका कर्तव्य है। उनका कहना है कि शाह के दौरे का विरोध उनके परिवार और उनके बेटे के बलिदान का अपमान होगा।
सवाल: 2: एक्शन कमेटी और परिवार के बीच किस बात को लेकर मतभेद उभरे हैं?
जवाब: एक्शन कमेटी ने अमित शाह के दौरे के बहिष्कार का ऐलान किया था, जबकि परिवार और विशेषकर पिता भीम सिंह गृह मंत्री से मिलकर अपनी बात रखना चाहते हैं और सीबीआई जांच की मांग करना चाहते हैं।
सवाल 3: परिवार की मुख्य कानूनी और प्रशासनिक मांग क्या है?
जवाब: परिवार की मुख्य मांग है कि इस सनसनीखेज मामले की जांच तुरंत सीबीआई को सौंपी जाए ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके और साक्ष्य सुरक्षित रहें।
‘मैं देश की सीमाओं पर सेवा कर चुका हूं। यदि कोई अमित शाह के दौरे का विरोध करता है, तो मैं इसे अपना और झोटा के शरीर का अपमान समझूंगा। हमें न्याय के लिए केवल केंद्रीय एजेंसी पर भरोसा है।’ – भीम सिंह, शहीद परविंदर सिंह झोटा के पिता
समापन और निष्कर्ष (Conclusion)
परविंदर सिंह झोटा की हत्या का यह मामला पंजाब की राजनीति और कानून-व्यवस्था के लिहाज से बेहद संवेदनशील बन चुका है। एक तरफ जहां स्थानीय स्तर पर न्याय की आस में जनता और एक्शन कमेटी सड़कों पर है, वहीं दूसरी तरफ शोक संतप्त पिता का यह रुख राजनीतिक समीकरणों को नया आयाम दे रहा है। परिवार की सर्वोच्च प्राथमिकता अपने बेटे के लिए इंसाफ हासिल करना है, जिसके लिए वे केंद्रीय जांच एजेंसी की मांग पर अड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि गृह मंत्री के दौरे के दौरान प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर क्या फैसले लिए जाते हैं और क्या इस परिवार को वह न्याय मिल पाता है जिसकी वे लंबे समय से गुहार लगा रहे हैं।


















