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मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने पाकिस्तान यात्रा के दौरान सार्क शिखर सम्मेलन की उठाई मांग, भारत की बढ़ी चिंता

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने पाकिस्तान यात्रा के दौरान सार्क शिखर सम्मेलन की उठाई मांग, भारत की बढ़ी चिंता

टारगेट न्यूज़ ग्राउंड रिपोर्ट: मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की हालिया पाकिस्तान यात्रा ने दक्षिण एशिया की भू-राजनीतिक हलचल को तेज कर दिया है। इस कूटनीतिक दौरे के दौरान एक बार फिर क्षेत्रीय सहयोग संगठन ‘सार्क’ (SAARC) के पुनरुद्धार और जल्द ही इसके शिखर सम्मेलन के आयोजन की मांग पुरजोर तरीके से उठाई गई है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित उच्चस्तरीय वार्ताओं के बीच राष्ट्रपति मुइज्जू का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्रीय समीकरणों में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। इस पूरी घटना ने न केवल कूटनीतिक गलियारों में बल्कि रणनीतिक जानकारों के बीच भी व्यापक चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।

ग्राउंड से मुख्य जानकारी (Key Takeaways)

  • मालदीव और पाकिस्तान के बीच रक्षा और समुद्री सहयोग सहित कुल 20 महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
  • राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने क्षेत्रीय कूटनीति को बढ़ावा देने के लिए जल्द से जल्द सार्क शिखर सम्मेलन बुलाने की अपील की है।
  • भारत के रणनीतिक हितों से जुड़े क्षेत्रों में इन समझौतों को लेकर कूटनीतिक हलकों में चिंता जताई जा रही है।
  • इससे पहले भी मुइज्जू ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की पेशकश की थी।

घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा (Chronological Event Breakdown)

मालदीव के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही मोहम्मद मुइज्जू की विदेश नीतियों में क्षेत्रीय संतुलन को लेकर कई बदलाव देखे गए हैं। अपनी इस ताजा पाकिस्तान यात्रा के दौरान उन्होंने पाकिस्तानी शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ताओं का दौर चलाया। इस मुलाकात का मुख्य आकर्षण दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में हुए 20 समझौते रहे। इनमें मुख्य रूप से रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान शामिल हैं। जानकारों का मानना है कि समुद्री और रक्षा मामलों में पाकिस्तान के साथ मालदीव की बढ़ती नजदीकी हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन को प्रभावित कर सकती है, जो कि भारत जैसे पड़ोसी देशों के लिए चिंता का विषय बन सकता है। इसके साथ ही, मुइज्जू द्वारा सार्क सम्मेलन के आयोजन की मांग कोई पहली बार नहीं उठाई गई है। इससे पहले इस वर्ष अपने देश के स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में भी उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने के लिए मध्यस्थ बनने की पेशकश की थी, जिसे कूटनीतिक जानकारों ने एक अप्रत्याशित कदम माना था।

प्रशासनिक व स्थानीय प्रतिक्रिया (Official Action & Public Reaction)

इस पूरी यात्रा और समझौतों के बाद अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन यानी सार्क पिछले कई वर्षों से भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय गतिरोध के कारण निष्क्रिय पड़ा हुआ है। ऐसे में मालदीव के राष्ट्रपति द्वारा इसे पुनर्जीवित करने का प्रयास क्षेत्रीय राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है। हालांकि, भारत के रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सीमा पार आतंकवाद और अन्य बुनियादी राजनीतिक मुद्दों का समाधान नहीं होता, तब तक ऐसे सम्मेलनों की सार्थकता पर सवाल बने रहेंगे।

क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए यह आवश्यक है कि इस क्षेत्र के सभी देश आपसी संवाद को प्राथमिकता दें और लंबित मुद्दों को कूटनीतिक माध्यमों से हल करें ताकि दक्षिण एशिया का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।

आगे क्या? (What Lies Ahead)

आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि मालदीव के राष्ट्रपति की इस पहल को अन्य सार्क सदस्य देशों से किस प्रकार का समर्थन मिलता है। भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए रखी है। समुद्री सुरक्षा और रक्षा समझौतों के क्रियान्वयन से हिंद महासागर क्षेत्र के भू-राजनीतिक परिदृश्य पर गहरा असर पड़ सकता है। क्षेत्रीय कूटनीति के मोर्चे पर आने वाले सप्ताह दोनों देशों और पूरे दक्षिण एशियाई संगठन के भविष्य के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण साबित होने की उम्मीद है।

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