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आज का धार्मिक दायित्व एवं व्रत कथा (2026-10-23): आज के पूज्य देव (संतोषी माता एवं शुक्र ग्रह), पूजा विधान एवं महात्म्य

आज का धार्मिक दायित्व एवं व्रत कथा (2026-10-23): आज के पूज्य देव (संतोषी माता एवं शुक्र ग्रह), पूजा विधान एवं महात्म्य

टारगेट न्यूज़ धर्म-अध्यात्म: 2026-10-23 का विशेष धार्मिक दायित्व, आज के पूज्य देव संतोषी माता एवं शुक्र ग्रह की पूजा विधि और पावन व्रत कथा।

🙏 आज के पूज्य देव: संतोषी माता एवं शुक्र ग्रह

आज का दिन माता संतोषी और शुक्र ग्रह की उपासना के लिए अत्यंत मंगलकारी एवं शांतिदायक माना गया है। जीवन में संतोष, संयम, सुख और ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए नियमित रूप से शुक्रवार का व्रत और पूजन करना अत्यंत फलदायी होता है। साधक को चाहिए कि वह आज के दिन किसी भी प्रकार के खट्टी चीजों का सेवन न करे और गरीबों की सहायता करके परोपकार का पुण्य अर्जित करे। इससे घर-परिवार में माता लक्ष्मी और संतोषी माता की असीम कृपा सदा बनी रहती है।

🪔 प्रातःकाल पूजा विधान (Puja Vidhan & Mantras):

शुक्रवार के दिन प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। माँ संतोषी की प्रतिमा या चित्र को स्थापित कर जल, रोली, अक्षत, धूप, दीप और श्वेत पुष्प अर्पित करें। माँ को गुड़ और चने का प्रसाद अत्यंत प्रिय है, अतः उसका भोग लगाकर सच्चे मन से संतोषी माता के व्रत एवं पूजन का संकल्प लें। अंत में आरती कर सभी में प्रसाद वितरित करें और भूलचूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें।

📖 पावन व्रत कथा एवं महात्म्य (Vrat Katha & Sacred Legend):

प्राचीन काल में एक गरीब बुढ़िया थी जिसके सात पुत्र थे। छह पुत्र कमाते और खाते थे जबकि सबसे छोटा बेटा अपनी भाभी के ताने सुनकर परदेश कमाने चला गया और लंबे समय तक वापस नहीं आया। दुखी बुढ़िया माँ संतोषी के मंदिर में प्रतिदिन विधिवत पूजा और व्रत करने लगी, जिससे प्रसन्न होकर संतोषी माता ने उसके छोटे पुत्र को धन-दौलत के साथ सकुशल घर लौटा दिया। पुत्र के लौटने पर बुढ़िया ने माता की कृपा मानते हुए श्रद्धापूर्वक उद्यापन किया, जिससे उनके घर में हमेशा सुख-शांति और समृद्धि बनी रही।

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