टारगेट न्यूज़ ग्राउंड रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश विधान परिषद (एमएलसी) की 11 सीटों के लिए हुए द्विवार्षिक चुनावों के बाद चुनावी हलचल तेज हो गई है। इस चुनाव में मतदाताओं के रुख में जबरदस्त विविधता देखने को मिली, जहां एक तरफ कुछ क्षेत्रों में रिकॉर्ड तोड़ मतदान दर्ज किया गया, वहीं दूसरी तरफ कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की उदासीनता भी साफ तौर पर महसूस की गई। राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र ने इस बार सबसे अधिक 79.32 प्रतिशत मतदान दर्ज कर एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है, जो शिक्षकों और शिक्षित वर्ग की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में गहरी रुचि को दर्शाता है। इसके विपरीत, मेरठ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत रही, जहां केवल 35.81 प्रतिशत मतदाताओं ने ही अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो कि एक चिंता का विषय है। इस पूरी चुनावी प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक व्यवस्थाओं, सुरक्षा इंतजामों और राजनीतिक दलों की सक्रियता का जमीनी जायजा लेने के लिए हमारे रिपोर्टर्स ने कई जिलों का दौरा किया और विस्तृत पड़ताल की है।
ग्राउंड से मुख्य जानकारी (Key Takeaways)
- उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनावों में कुल मतदान प्रतिशत में भारी अंतर दर्ज किया गया।
- गोरखपुर-फैजाबाद टीचर्स कॉन्स्टिट्यूएंसी में सबसे अधिक 79.32% मतदान हुआ, जो पूरे राज्य में शीर्ष पर रहा।
- मेरठ ग्रेजुएट्स कॉन्स्टिट्यूएंसी में सबसे कम 35.81% वोटिंग रिकॉर्ड की गई, जहां मतदाताओं में सुस्ती दिखी।
- आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के तीन मतदान केंद्रों पर गड़बड़ी की शिकायतों के बाद रीपोल (पुनः मतदान) की सिफारिश की गई है।
- भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की अंतिम मुहर लगते ही रीपोल की तारीखों का आधिकारिक ऐलान किया जाएगा।
घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा (Chronological Event Breakdown)
मतदान की शुरुआत तय समय पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुई थी। सुबह के सत्र में विभिन्न शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले पोलिंग बूथों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। खासकर गोरखपुर, बस्ती, अयोध्या और आसपास के जिलों में फैले गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के तहत शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और सुबह से ही बूथों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। दोपहर होते-होते तापमान में वृद्धि के साथ कुछ शहरी क्षेत्रों में मतदान की रफ्तार धीमी जरूर हुई, लेकिन ग्रामीण और कस्बाइयों इलाकों में उत्साह बरकरार रहा। इसके विपरीत, मेरठ संभाग के अंतर्गत आने वाले स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में स्थिति सुस्त रही। युवाओं और कामकाजी स्नातकों में अपेक्षित उत्साह नहीं दिखा, जिसके चलते वहां का आंकड़ा 40 प्रतिशत के आंकड़े को भी नहीं छू सका। मतदान संपन्न होने के बाद जब ईवीएम और मतपेटी सीलिंग की प्रक्रिया चल रही थी, तभी आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के तीन विशिष्ट बूथों से अनियमितताओं और प्रक्रियागत खामियों की शिकायतें प्राप्त हुईं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर ने तत्काल प्रभाव से गहन जांच की और इन तीनों बूथों पर दोबारा मतदान (रीपोल) कराने की औपचारिक संस्तुति राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के माध्यम से केंद्रीय निर्वाचन आयोग को भेज दी।
प्रशासनिक व स्थानीय प्रतिक्रिया (Official Action & Public Reaction)
प्रशासनिक अधिकारियों ने इस चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए कड़े कदम उठाए थे। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त पुलिस बल और माइक्रो ऑब्जर्वर तैनात किए गए थे। आगरा में रीपोल की सिफारिश के बाद जिला प्रशासन ने स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में बताया है और आयोग के निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है। दूसरी ओर, स्थानीय राजनीतिज्ञों और शिक्षक संघों ने मतदान प्रतिशत में आए इस भारी अंतर को लेकर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं।
स्थानीय शिक्षक संघ के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि ने कहा, हमने गोरखपुर-फैजाबाद क्षेत्र में शिक्षकों के अधिकारों और लंबित मांगों को लेकर जबरदस्त एकजुटता देखी है। रिकॉर्ड मतदान इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि शिक्षक वर्ग अपने भविष्य और नेतृत्व के प्रति पूरी तरह सतर्क और जागरूक है।
वहीं, कम मतदान वाले क्षेत्रों के जानकारों का मानना है कि स्नातक मतदाताओं की सूची के नवीनीकरण में देरी और चुनाव प्रचार के दौरान उचित जनजागरूकता का अभाव इसके मुख्य कारणों में शामिल रहा है। राजनीतिक दलों के रणनीतिकार भी इन आंकड़ों का गहन विश्लेषण करने में जुट गए हैं क्योंकि आने वाले बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों के लिहाज से इन विधान परिषद चुनावों के परिणाम बेहद अहम माने जा रहे हैं।
आगे क्या? (What Lies Ahead)
अब सभी की निगाहें भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के अगले कदम पर टिकी हैं। आयोग जल्द ही आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के उन तीन बूथों पर रीपोल की तारीखों की घोषणा करेगा जहां दोबारा मतदान की संस्तुति की गई है। रीपोल की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सभी 11 सीटों के लिए डाले गए वोटों की गिनती (मतगणना) की तारीख तय होगी। इस चुनाव के परिणाम तय करेंगे कि विधान परिषद के अंदर विभिन्न दलों का शक्ति संतुलन किस करवट बैठता है। टारगेट न्यूज़ इस पूरी प्रक्रिया पर लगातार पैनी नजर बनाए रखेगा और मतगणना के दिन पल-पल की सटीक अपडेट अपने पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाता रहेगा।


















