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पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ जनआंदोलन की हुंकार: राकेश टिकैत ने परिवार से की अंतिम संस्कार की अपील

पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ जनआंदोलन की हुंकार: राकेश टिकैत ने परिवार से की अंतिम संस्कार की अपील

टारगेट न्यूज़ की विशेष रिपोर्ट: भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और वरिष्ठ किसान नेता राकेश टिकैत ने शनिवार को मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता दिवंगत परविंदर सिंह झोटा के परिवार से मुलाकात की और उनके पिता भीम सिंह से पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार करने की अपील की। राकेश टिकैत ने इस दौरान पंजाब की धरती से राज्य को नशामुक्त बनाने के लिए एक व्यापक जनआंदोलन शुरू करने का आह्वान किया। उन्होंने परविंदर सिंह झोटा को राज्य में नशा विरोधी अभियान का ‘पहला शहीद’ करार देते हुए कहा कि उनका यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और उनके सपनों का पंजाब बनाने के लिए हरसंभव संघर्ष जारी रहेगा। टिकैत ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि न्याय की मांग लोकतांत्रिक तरीके से की जाएगी और आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा, लेकिन शव को रखकर विरोध प्रदर्शन करना एकमात्र विकल्प नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि दिवंगत कार्यकर्ता के सम्मान में स्थानीय कॉलेजों, शिक्षण संस्थानों और प्रमुख मार्गों का नामकरण उनके नाम पर किया जाना चाहिए, क्योंकि उनके अभियान का प्रभाव न केवल पंजाब बल्कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों तक महसूस किया गया था।

घटना की गहराई और प्रमुख पहलू (Deep Breakdown)

  • राकेश टिकैत ने मानसा पहुंचकर परविंदर सिंह झोटा के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया।
  • किसान नेता ने केंद्र सरकार और विभिन्न राज्यों की सरकारों की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए तथा नशीले पदार्थों की तस्करी के अंतरराष्ट्रीय व अंतर-राज्यीय नेटवर्क की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
  • टिकैत ने मांग की कि जिन फैक्ट्रियों में कैप्सूल और नशीली दवाओं का अवैध निर्माण होता है, उनके लाइसेंस रद्द किए जाएं और उन पर तत्काल ताला लगाया जाए।
  • उन्होंने संगरूर जिले में मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान काले झंडे दिखाने वाले मोहनजीत सिंह शेरों से भी मुलाकात की और पुलिसिया कार्रवाई की निंदा की।

पृष्ठभूमि और बड़ा परिदृश्य (Background & Context)

पंजाब में लंबे समय से नशा एक गंभीर सामाजिक संकट बना हुआ है, जिसने राज्य की युवा पीढ़ी को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। परविंदर सिंह झोटा इसी नशाखोरी के खिलाफ लंबे समय से सक्रिय रूप से संघर्ष कर रहे थे। उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद से पूरे इलाके में भारी आक्रोश व्याप्त है और ग्रामीण व विभिन्न सामाजिक संगठन न्याय की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं। किसान संगठनों और स्थानीय एक्शन कमेटी का आरोप है कि इस मामले में पुलिस प्रशासन का रवैया ढीला रहा है और मुख्य आरोपियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। दूसरी ओर, राकेश टिकैत ने इस पूरे प्रकरण को केवल एक आपराधिक घटना न मानकर इसे एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक तंत्र की विफलता बताया है। उनका कहना है कि देश के विभिन्न हिस्सों से नशीले पदार्थों की खेप पकड़े जाने के बावजूद आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पूरी तरह से लगाम क्यों नहीं लग पा रही है, यह एक गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने विशेष रूप से गुजरात और नेपाल के जरिए होने वाली तस्करी की ओर इशारा करते हुए केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।

प्रभाव और दूरगामी परिणाम (Impact Analysis)

इस आंदोलन और राकेश टिकैत के इस दौरे के बाद पंजाब की राजनीति और सामाजिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है। राज्य में नशा विरोधी अभियान को अब एक नई धार मिलने की संभावना है। यदि किसान संगठनों और स्थानीय लोगों का यह जनआंदोलन उम्मीद के मुताबिक व्यापक रूप लेता है, तो आने वाले दिनों में यह सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। युवाओं और किसानों का एक मंच पर आना सत्तापक्ष पर दबाव बढ़ाने का काम करेगा। इसके अलावा, दवा बनाने वाली फैक्ट्रियों और कैप्सूल निर्माण इकाइयों पर सख्त निगरानी रखने की मांग से स्वास्थ्य और आबकारी विभागों पर भी पारदर्शी कामकाज का दबाव बढ़ेगा। समाज के हर वर्ग तक यह संदेश जा रहा है कि नशे के खिलाफ लड़ाई अब केवल पुलिस या सरकार के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती, बल्कि इसके लिए जनसहभागिता अनिवार्य है।

हम इतने कमजोर नहीं हैं कि शव को रखकर विरोध प्रदर्शन करना पड़े। हमारा संघर्ष और अभियान निरंतर जारी रहेगा। हम न्याय मिलने तक एक्शन कमेटी और पीड़ित परिवार के साथ पूरी दृढ़ता के साथ खड़े हैं। – राकेश टिकैत, राष्ट्रीय प्रवक्ता, भारतीय किसान यूनियन

अंतिम निष्कर्ष (Final Takeaway)

परविंदर सिंह झोटा की मौत और उसके बाद उपजा आक्रोश इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पंजाब की जनता अब नशे के अभिशाप से मुक्ति चाहती है। किसान नेताओं द्वारा इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाना और इसे एक जनआंदोलन का रूप देने का प्रयास इस लड़ाई को एक नया आयाम दे रहा है। आवश्यकता इस बात की है कि सभी राजनीतिक दल अपनी संकीर्ण प्राथमिकताओं से ऊपर उठकर इस गंभीर सामाजिक आपदा के खिलाफ एकजुट हों और प्रशासनिक मशीनरी पूरी ईमानदारी से तस्करों तथा उनके संरक्षकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करे। तभी एक स्वस्थ, सशक्त और नशामुक्त पंजाब का सपना साकार हो सकेगा।

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