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झोटा हत्याकांड: पंजाब में 13वें दिन भी प्रदर्शन जारी, सीएम मान और केजरीवाल के पुतले फूंके

झोटा हत्याकांड: पंजाब में 13वें दिन भी प्रदर्शन जारी, सीएम मान और केजरीवाल के पुतले फूंके

टारगेट न्यूज़: पंजाब में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की निर्मम हत्या के मामले को लेकर राज्यभर में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। हत्या के खिलाफ न्याय की मांग को लेकर चल रहे इस आंदोलन का दायरा अब व्यापक हो गया है और प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार तथा सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। एक्शन कमेटी के आह्वान पर रविवार को पंजाब के विभिन्न गांवों और कस्बों में लोगों ने झाड़ू (जो कि आम आदमी पार्टी का चुनाव चिन्ह है) और मुख्यमंत्री भगवंत मान तथा आप संयोजक अरविंद केजरीवाल के पुतले जलाए। इस विरोध प्रदर्शन ने राज्य की राजनीतिक सरगर्मी को और अधिक बढ़ा दिया है, जहां विपक्षी दल और स्थानीय नागरिक पुलिस प्रशासन व सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। आंदोलन के इस नए चरण के तहत सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें ग्रामीण और शहरी इलाकों के लोग बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करते हुए नजर आ रहे हैं। हालांकि, एक्शन कमेटी ने प्रदर्शनकारियों से पूरी तरह शांति बनाए रखने और कानून को अपने हाथ में न लेने की सख्त अपील की है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। मानसा में डीसी आवास के पास चल रहा मुख्य धरना इस विरोध का केंद्र बन गया है, जहां बड़ी संख्या में लोग और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि जुट रहे हैं। मृतक परविंदर सिंह झोटा के परिवार का संघर्ष पिछले कई दिनों से जारी है और उनकी जिद है कि जब तक उनकी सभी प्रमुख मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक वे शव का पोस्टमार्टम नहीं करवाएंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने पंजाब की कानून-व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है और आम जनता के बीच सरकार की छवि को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच अब तक कई दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है, जिससे स्थिति जस की तस बनी हुई है।

मुख्य बिंदु एवं हाइलाइट्स (Key Highlights)

  • परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड को लेकर पंजाब भर में उग्र प्रदर्शन, आंदोलन का 13वां दिन पूरा हुआ।
  • एक्शन कमेटी के आह्वान पर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में झाड़ू तथा सीएम भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल के पुतले फूंके गए।
  • परिजनों और एक्शन कमेटी की जिद के चलते मृतक का शव अभी भी सिविल अस्पताल के शवगृह में सुरक्षित रखा है, पोस्टमार्टम से इनकार।
  • प्रदर्शनीकारी मुख्यमंत्री और डीजीपी के इस्तीफे के साथ-साथ मानसा के एसएसपी वैभव चौधरी पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
  • मामले में अब तक मुख्य आरोपी अश्विनी समेत चार लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जो सीबीआई की हिरासत में हैं।

विस्तृत समाचार एवं पूरा घटनाक्रम (Detailed Report)

इस पूरे मामले की शुरुआत 13 अक्टूबर को हुई थी जब नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद से ही मानसा जिले में भारी रोष व्याप्त है और पिछले तेरह दिनों से मानसा में दो अलग-अलग स्थानों पर धरने-प्रदर्शन जारी हैं। एक्शन कमेटी की ओर से लगातार यह आरोप लगाया जा रहा है कि राज्य में नशे का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है और इसके खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों का यह भी कहना है कि पुलिस प्रशासन और स्थानीय अधिकारी नशा तस्करों के साथ मिले हुए हैं, जिसके कारण इस प्रकार की जघन्य वारदातों को अंजाम दिया जा रहा है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई को सौंप दी गई है, और वर्तमान में मुख्य आरोपी एक केमिस्ट जिसका नाम अश्विनी है, सहित कुल चार लोग सीबीआई की हिरासत में हैं और उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है।

राज्य सरकार की ओर से स्थिति को संभालने के लिए कई मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के एक पैनल का गठन किया गया था। इस पैनल और एक्शन कमेटी के बीच अब तक कुल तीन दौर की उच्चस्तरीय बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन ये सभी वार्ताएं बेनतीजा साबित हुईं। प्रदर्शनकारियों का रुख बहुत स्पष्ट है कि वे केवल आरोपियों की गिरफ्तारी से संतुष्ट नहीं हैं, बल्कि वे प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई चाहते हैं। उनकी प्रमुख मांगों में मुख्यमंत्री भगवंत मान और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) का इस्तीफा शामिल है। इसके अलावा, वे मानसा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) वैभव चौधरी को तुरंत बर्खास्त करने की मांग पर अड़े हुए हैं। पीड़ित परिवार का साफ कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ने देंगे। प्रशासन के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण बन गई है क्योंकि एक तरफ जनता का भारी दबाव है तो दूसरी तरफ राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है।

हम सरकार की खोखली गारंटियों और झूठे वादों से तंग आ चुके हैं। हमारे भाई परविंदर सिंह झोटा ने राज्य से नशा खत्म करने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी, लेकिन आज सरकार अपराधियों को बचाने का प्रयास कर रही है। जब तक सीएम, डीजीपी इस्तीफा नहीं देते और दोषी एसएसपी पर कार्रवाई नहीं होती, हमारा संघर्ष यूं ही जारी रहेगा। – एक्शन कमेटी प्रवक्ता

भविष्य का असर एवं निष्कर्ष (Future Impact & Conclusion)

परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड और उसके बाद भड़का यह जन-आंदोलन पंजाब की वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक स्थिति पर दूरगामी प्रभाव छोड़ने की क्षमता रखता है। आने वाले दिनों में यदि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच का गतिरोध जल्द समाप्त नहीं होता है, तो यह आंदोलन राज्य के अन्य हिस्सों में भी विकराल रूप धारण कर सकता है। आगामी चुनावों और राजनीतिक माहौल के मद्देनजर यह घटनाक्रम आम आदमी पार्टी की सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। विपक्षी दलों ने भी इसे लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है, जिससे राजनीतिक पारा लगातार चढ़ रहा है। अंततः, इस संकट का शांतिपूर्ण और न्यायसंगत समाधान तभी निकल सकता है जब निष्पक्ष जांच के माध्यम से सभी दोषियों को कड़ी सजा मिले और सरकार जनता के बीच खोए हुए विश्वास को फिर से बहाल करने के लिए पारदर्शी कदम उठाए। राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति और सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका पर जनता की पैनी नजर बनी हुई है।

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