द टारगेट न्यूज़:
आम आदमी पार्टी (आप) के तीन पूर्व नेताओं कुंवर विजय प्रताप सिंह, हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने से अकाली दल के साथ संभावित गठबंधन की संभावनाओं और सीट-बंटवारे के समीकरणों को लेकर जटिलताएं पैदा हो गई हैं। दोनों दलों के नेताओं का कहना है कि गठबंधन पर कोई भी फैसला शीर्ष नेतृत्व को करना है, लेकिन जमीनी स्तर पर मिल रहे राजनीतिक संकेत असमंजस पैदा करने वाले हैं। अमृतसर उत्तर के पूर्व विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह का मामला विशेष रूप से चर्चा में है, क्योंकि वह अकाली दल और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ बेअदबी की घटनाओं को लेकर मुखर आलोचक रहे हैं। पंजाब पुलिस में IG रहते हुए उन्होंने बेअदबी मामलों में पुलिस फायरिंग की जांच का नेतृत्व किया था, हालांकि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने उस जांच को स्वीकार नहीं किया था और कड़ी टिप्पणियां की थीं। राजनीति में आने के बाद भी उन्होंने फरीदकोट का दौरा कर बेअदबी और पुलिस फायरिंग से प्रभावित परिवारों से मुलाकात जारी रखी थी। उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव में अमृतसर उत्तर से वरिष्ठ अकाली नेता अनिल जोशी को हराया था। इसके अलावा, मौजूदा विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा की स्थिति भी पेचीदा है। अकाली दल पहले ही समाना से जगमीत हरियाऊ को अपना उम्मीदवार घोषित कर चुका है और सनौर सीट को लेकर भी चंद्रमाजरा परिवार के लिए समीकरण तय माने जा रहे हैं। इन घटनाक्रमों के बीच इस बात को लेकर अटकलें तेज हैं कि क्या भाजपा इन नेताओं को उनके पारंपरिक क्षेत्रों से चुनाव लड़वाएगी और यदि गठबंधन होता है तो यह ढांचा कैसे तैयार होगा। एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने स्पष्ट किया कि पार्टी में शामिल होने का मतलब स्वतः टिकट मिलना नहीं है और भाजपा सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले या गठबंधन की स्थिति में अधिकतम सीटों पर लड़ने की तैयारी कर रही है। वहीं, अकाली दल के सूत्रों का कहना है कि गठबंधन होने की स्थिति में उम्मीदवारों की जीत की क्षमता और जमीनी हकीकत को सर्वोपरि रखा जाएगा।


















