चंडीगढ़ | राजवीर दीक्षित
(Strict Action on Toxic Pesticides: Now Provision of Up to 5 Years in Jail) किसानों की सुरक्षा और खेती को जहरीले रसायनों से बचाने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार 57 साल पुराने ‘कीटनाशक अधिनियम 1968’ को बदलकर नया ‘पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल’ लाने की तैयारी में है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इस बिल को जल्द ही संसद में पेश किया जाएगा।
देश में हर साल जहरीले कीटनाशकों के कारण करीब 7500 किसानों की मौत हो जाती है। इसके अलावा खाने-पीने की चीजें भी इन रसायनों के कारण दूषित हो रही हैं, जो आम लोगों की सेहत के लिए खतरा बन रही हैं। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार ने इस नए कानून में सख्त नियम शामिल किए हैं।
नए बिल के तहत अब सभी कीटनाशकों की डिजिटल ट्रैकिंग अनिवार्य होगी। देशी और विदेशी, हर प्रकार के कीटनाशक को सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर करना होगा। इससे अवैध और नकली उत्पादों पर लगाम लगेगी।
किसानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें प्रोटेक्टिव गियर पहनना अनिवार्य किया जाएगा। साथ ही कीटनाशकों के सही इस्तेमाल और छिड़काव की ट्रेनिंग भी दी जाएगी। इससे दुर्घटनाओं और जहरीले प्रभावों को कम किया जा सकेगा।
कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान रखा गया है। जहरीले कीटनाशक बनाने या बेचने वालों को 5 साल तक की जेल और 40 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। बार-बार अपराध करने पर कंपनियों का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
इसके अलावा बिना लाइसेंस उत्पादन, गलत बिक्री या एक्सपायरी उत्पाद बेचने पर भी भारी जुर्माना लगाया जाएगा। सरकार इस कानून के जरिए कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और किसानों की जिंदगी सुरक्षित करने की दिशा में बड़ा बदलाव लाने की कोशिश कर रही है।



















