नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित
(Bharat Bandh Sees Mixed Impact Across Punjab)भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापारिक समझौते के विरोध में विभिन्न संगठनों द्वारा बुलाए गए भारत बंद का पंजाब में व्यापक लेकिन मिला-जुला असर देखने को मिला। ट्रेड यूनियनों, किसान संगठनों और कर्मचारी यूनियनों ने बंद को समर्थन देते हुए कई जगहों पर प्रदर्शन और धरना दिया। हालांकि राज्यभर में जनजीवन पूरी तरह ठप नहीं हुआ, लेकिन कुछ सेवाओं पर असर जरूर पड़ा।
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सबसे बड़ा प्रभाव परिवहन व्यवस्था पर देखा गया। कर्मचारियों द्वारा सरकारी बसों का चक्का जाम किए जाने के ऐलान के बाद कई रूटों पर बस सेवाएं प्रभावित रहीं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर, राज्य के अधिकांश बाजार सामान्य रूप से खुले रहे और व्यापारिक गतिविधियां जारी रहीं। बैंकिंग सेवाओं पर भी आंशिक असर पड़ा—ज्यादातर बैंकों में कामकाज चलता रहा, जबकि कुछ शाखाओं में कर्मचारियों ने हड़ताल की।
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कई सरकारी विभागों में कामकाज प्रभावित हुआ है, खासकर जहां ठेका (कॉन्ट्रैक्ट) कर्मचारी हड़ताल पर रहे। स्थायी कर्मचारियों ने अधिकांश स्थानों पर अपनी ड्यूटी जारी रखी, जिससे पूरी तरह से कामकाज बंद नहीं हुआ।
जालंधर में पंजाब नेशनल बैंक के कर्मचारियों, लुधियाना में मिड-डे मील वर्करों और पंजाब बैंक इम्प्लाइज फेडरेशन ने धरना-प्रदर्शन किया। अमृतसर के भंडारी पुल पर भी प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
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इधर, पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के कर्मचारी संगठनों ने भी एक दिन की हड़ताल का ऐलान किया। प्रबंधन ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि हड़ताल में शामिल कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। कुल मिलाकर, पंजाब में भारत बंद का असर आंशिक लेकिन प्रभावी रहा।

















