नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित
(Smart Glasses Spark Privacy Fears for Women in Public Places)तकनीक ने जहां इंसानी जीवन को पहले से कहीं अधिक आसान और तेज़ बनाया है, वहीं इसका गलत इस्तेमाल अब समाज के लिए एक नया खतरा बनता जा रहा है। हाल के दिनों में बाजार में आए स्मार्ट चश्मे (Smart Glasses) खासकर महिलाओं और लड़कियों की निजता के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गए हैं। इन चश्मों में लगे बेहद छोटे और छिपे हुए कैमरे बिना किसी संकेत के सामने मौजूद व्यक्ति की वीडियो रिकॉर्ड कर सकते हैं, जिससे प्राइवेसी पूरी तरह खतरे में पड़ जाती है।
➡️ हमारे Video चैनल को देखने के लिए इस Line को Click करें, Follow करें व Like करें। आपको Updates मिलते रहेंगे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ लोग इन स्मार्ट चश्मों का दुरुपयोग कर सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की गुपचुप तरीके से रिकॉर्डिंग कर रहे हैं। खुद को सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर या तथाकथित ‘पिक-अप आर्टिस्ट’ बताने वाले लोग बस स्टॉप, पार्क, बाजार, समुद्र तट और सड़कों पर महिलाओं से बातचीत के दौरान उनकी अनुमति के बिना वीडियो बना लेते हैं। बाद में इन वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर दिया जाता है, जहां उन पर आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणियां की जाती हैं। कई मामलों में पीड़ित महिलाओं को तब जानकारी मिलती है, जब वीडियो पहले ही वायरल हो चुकी होती है।
यह भी पढ़ें: ‘अव्यवस्थित व्यवहार’ के आरोप में राजा वड़िंग समेत 8 विपक्षी सांसद लोकसभा से निलंबित
कानूनी दृष्टि से भी यह मामला गंभीर चुनौती पेश करता है। मोबाइल फोन से रिकॉर्डिंग के दौरान कैमरा स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, लेकिन स्मार्ट चश्मों में कैमरा छिपा होने के कारण इसकी पहचान करना बेहद मुश्किल हो जाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि भारत सहित अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में भी सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह की गुप्त रिकॉर्डिंग को लेकर कोई ठोस और स्पष्ट कानून मौजूद नहीं है। भारत के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट में भी इस विषय पर स्पष्ट दिशा-निर्देशों की कमी है।
Video देखें: नंगल–भाखड़ा मार्ग पर हुए झगड़े का सच जानना चाहते हैं लोग 🤔🔥 आख़िर अचानक विवाद क्यों भड़का? असली वजह क्या थी?
विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर पहले से अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। साथ ही सरकार को सख्त नियम बनाने और तकनीक कंपनियों को ऐसे फीचर विकसित करने चाहिए, जिससे रिकॉर्डिंग के दौरान सामने वाले व्यक्ति को स्पष्ट संकेत मिल सके। यह मामला अब केवल तकनीक का नहीं, बल्कि सुरक्षा, निजता और कानून का गंभीर सवाल बन चुका है।

















