चंडीगढ। राजवीर दीक्षित
(Jugadu Rehri Union Faces Major Setback in High Court)पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से जुगाड़ू रेहड़ियों और मॉडिफाइड वाहनों से जुड़े हजारों लोगों को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने जुगाड़ू रेहड़ी यूनियन द्वारा दायर याचिका पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि याचिका वापस नहीं ली गई, तो इसे भारी जुर्माने के साथ खारिज कर दिया जाएगा। हाईकोर्ट की इस कड़ी टिप्पणी के बाद यूनियन को अपनी याचिका वापस लेनी पड़ी, जिसके बाद अदालत ने उसे औपचारिक रूप से खारिज कर दिया।
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याचिका पंजाब रेहड़ी, घोड़ा-टांगा रिक्शा मजदूर यूनियन की ओर से दाखिल की गई थी। यूनियन का तर्क था कि हाईकोर्ट के पहले के आदेशों के बाद सरकार और पुलिस प्रशासन जुगाड़ू रिक्शा और रेहड़ियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहा है। इससे करीब दो लाख से अधिक लोग, जो इन वाहनों के जरिए रोज़ी-रोटी कमाते हैं, गंभीर संकट में आ गए हैं।
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मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने सवाल उठाया कि जब कानून में ऐसे संशोधित या जुगाड़ू वाहनों के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, तो इन्हें सड़क पर चलाने की अनुमति कैसे दी जा सकती है। अदालत ने दो टूक कहा कि या तो याचिकाकर्ता याचिका वापस लें या फिर अदालत इसे जुर्माने के साथ खारिज करेगी।
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यूनियन ने यह भी दलील दी कि पंजाब में बढ़ती बेरोजगारी के चलते कई पढ़े-लिखे युवा, जिनमें बी.टेक और ग्रेजुएट शामिल हैं, मजबूरी में जुगाड़ रिक्शा और रेहड़ी चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। उनका कहना था कि अगर यह रोजगार छिन गया तो हजारों परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे।
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यूनियन ने अपने सदस्यों के लिए पुनर्वास और मुआवजे की मांग भी रखी थी, लेकिन हाईकोर्ट के सख्त रुख के आगे उनकी दलीलें टिक नहीं सकीं। अदालत के इस फैसले को राज्य में जुगाड़ू वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एक अहम मोड़ माना जा रहा है।

















