नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित
(20-Year Cooling-Off Rule Likely as Naravane Memoir Sparks Row)पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्र सरकार वरिष्ठ पदों पर रहे अधिकारियों के लिए सख्त नियम लागू करने पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के मुताबिक रिटायरमेंट के बाद ऐसे अफसरों पर 20 साल का “कूलिंग-ऑफ पीरियड” लागू किया जा सकता है, जिसके दौरान वे अपनी सेवा से जुड़ी किताब प्रकाशित नहीं कर सकेंगे। इस मुद्दे पर शुक्रवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में अनौपचारिक चर्चा हुई और सूत्रों का कहना है कि जल्द ही आदेश जारी हो सकता है।
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विवाद तब शुरू हुआ जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद में नरवणे के मेमॉयर ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ का हवाला देने की कोशिश की। सरकार ने कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि पुस्तक अभी प्रकाशित नहीं हुई है। बाद में राहुल गांधी कथित कॉपी संसद लेकर पहुंचे, जिसके बाद इसकी पीडीएफ सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने कॉपीराइट उल्लंघन और अवैध सर्कुलेशन को लेकर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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पुस्तक के प्रकाशक पेंगुइन इंडिया ने बयान जारी कर कहा कि जो भी सामग्री प्रसारित हो रही है वह कॉपीराइट का उल्लंघन है और किताब अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। नरवणे ने भी प्रकाशक के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि पुस्तक को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।
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बताया जा रहा है कि मेमॉयर में 2020 के लद्दाख सीमा विवाद, गलवान घाटी की घटनाओं, पैंगोंग त्सो क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई और अग्निपथ योजना से जुड़े फैसलों का उल्लेख है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि सैन्य जवाबी कार्रवाई के दौरान राजनीतिक निर्देशों में देरी का जिक्र विवाद की मुख्य वजह बना। रक्षा मंत्रालय ने पुस्तक को प्रकाशन से पहले अनिवार्य अनुमति के लिए रोका हुआ है।
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वर्तमान नियमों के तहत केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1972 और आधिकारिक गोपनीयता कानून संवेदनशील जानकारी के प्रकाशन पर रोक लगाते हैं। प्रस्तावित 20 वर्षीय कूलिंग-ऑफ अवधि लागू होने पर सैन्य और रणनीतिक पदों पर रहे अधिकारियों की पुस्तकों पर पहले से कहीं अधिक सख्ती देखने को मिल सकती है।

















