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नए आदेशों के बाद भी नहीं जागा पंजाब शिक्षा बोर्ड बोर्ड, सुस्ती और कमजोर तैयारी बनी सिरदर्द

चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(Board Remains Sluggish Despite New Orders)पंजाब में आगामी बोर्ड परीक्षाओं को लेकर पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। मार्च 2026 में होने वाली 8वीं, 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं के लिए जारी नए आदेशों ने बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों और स्कूल मुखियों में बोर्ड के सुस्त रवैये और कमजोर योजना को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है।

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बोर्ड पर आरोप है कि उसने समय रहते परीक्षाओं की तैयारी करने के बजाय अंतिम समय में हड़बड़ी में प्रक्रिया शुरू की। अप्रैल से सितंबर तक का अहम समय, जो परीक्षा व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है, उस दौरान बोर्ड निष्क्रिय रहा। अब जब परीक्षाएं नजदीक हैं, तो जिम्मेदारियां शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधन पर डाल दी गई हैं।

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सबसे बड़ा विवाद परीक्षा केंद्रों की भौतिक जांच को लेकर सामने आया है। नियमों के अनुसार यह जिम्मेदारी बोर्ड की होनी चाहिए थी, लेकिन बोर्ड ने अपने हाथ खड़े कर दिए और यह कार्य शिक्षा विभाग के नोडल अधिकारियों और स्कूल प्रिंसिपलों पर छोड़ दिया। हालात ऐसे बन गए हैं कि एक स्कूल का प्रिंसिपल दूसरे स्कूल जाकर यह जांच करने को मजबूर है कि केंद्र रद्द करने की मांग सही है या नहीं।

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कई स्कूलों ने निर्माण कार्य, बैठने की सीमित क्षमता और बुनियादी सुविधाओं की कमी का हवाला देते हुए परीक्षा केंद्र रद्द करने की मांग की है। कुछ स्कूलों में तो परीक्षाओं के लिए पर्याप्त डेस्क तक उपलब्ध नहीं हैं, जिसके चलते दूसरे स्कूलों से फर्नीचर उधार लेना पड़ रहा है। यह स्थिति बोर्ड के कमजोर प्रबंधन की पोल खोलती है।

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शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बोर्ड छात्रों से मोटी परीक्षा फीस तो वसूलता है, लेकिन जमीनी स्तर पर मेहनत शिक्षा विभाग को करनी पड़ रही है। बोर्ड फिलहाल केवल आदेश जारी करने तक सीमित नजर आ रहा है, जिससे परीक्षा व्यवस्था पर सवाल और गहरे होते जा रहे हैं।

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