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पंजाब के रोपड़ में अवैध खनन से उजड़ रहीं शिवालिक पहाड़ियां, पर्यावरण पर बड़ा खतरा !

रोपड़ | राजवीर दीक्षित
(Illegal Mining Threatens Shivalik Hills in Punjab’s Ropar)हरियाणा और राजस्थान की अरावली पहाड़ियों को हुए भारी नुकसान के बाद अब पंजाब की शिवालिक पर्वतमाला पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। नंगल उपमंडल के खेड़ा कलमोट क्षेत्र में कथित अवैध खनन ने पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

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जांच के दौरान सामने आया कि भारी पोकलेन मशीनों से पहाड़ियों की कटाई कर मिट्टी और पत्थर निकाले जा रहे हैं। कई जगह छोटी पहाड़ियां पूरी तरह समतल कर दी गई हैं, जिससे इलाके का प्राकृतिक स्वरूप बदलता दिख रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शाम होते ही मशीनें कतार में लग जाती हैं और रात के अंधेरे में खनन शुरू हो जाता है।

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पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि भूगर्भीय रूप से नाजुक शिवालिक पहाड़ियां भूजल संरक्षण और जैव विविधता के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। एक बार इनका ढांचा बिगड़ने पर इसे दोबारा पहले जैसा बनाना लगभग असंभव है।

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ग्रामीणों ने धूल और भारी वाहनों की आवाजाही से बढ़ती सांस संबंधी समस्याओं और खराब होती जीवनशैली पर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि शांत पहाड़ी इलाका अब खनन क्षेत्र में बदल गया है।
खनन अधिकारी गुरदेव सिंह गर्चा ने बताया कि खेड़ा कलमोट में 70 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन के लिए पर्यावरणीय मंजूरी दी गई है और विभाग IIT रोपड़ की मदद से अवैध खनन पर नजर रखता है। हालांकि सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि जुर्माना लगाना समाधान नहीं है, क्योंकि पर्यावरण को हुआ नुकसान स्थायी हो सकता है।

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पूर्व बार एसोसिएशन अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा ने चेतावनी दी कि सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के अनुसार जहां अपूरणीय क्षति हो सकती है, वहां खनन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उनका कहना है—यदि तय सीमा से अधिक या बिना कड़े सुरक्षा उपायों के खनन हो रहा है, तो इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।
👉 सवाल बड़ा है—क्या समय रहते कार्रवाई होगी या शिवालिक पहाड़ियां यूं ही मिटती रहेंगी ?

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