सोलन। राजवीर दीक्षित
(Electric Bus Reaches Solan, Key Flown in by Air)हिमाचल प्रदेश के सोलन से सामने आई एक अनोखी और दिलचस्प घटना इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसने सरकारी तंत्र, तकनीक और मानवीय भूल—तीनों को एक साथ सुर्खियों में ला दिया है। हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (HRTC) की इलेक्ट्रिक बस सेवा के ट्रायल के दौरान ऐसा वाकया हुआ, जिसे लोग “नेक्स्ट लेवल डिलीवरी” कहकर सोशल मीडिया पर भी खूब शेयर कर रहे हैं।
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दरअसल, हैदराबाद की एक निजी कंपनी द्वारा HRTC के लिए एक इलेक्ट्रिक बस ट्रायल के उद्देश्य से सोलन भेजी गई। बस को ट्राले (ट्रक) पर लादकर समय पर तो भेज दिया गया, लेकिन एक बेहद जरूरी चीज—बस की चाबी—हैदराबाद में ही रह गई। सोमवार शाम बस सोलन पहुंची, लेकिन मंगलवार को जब निगम की टीम ने उसे ट्राले से नीचे उतारने और स्टार्ट करने की कोशिश की, तब चाबी न मिलने से पूरा मामला अटक गया।
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चाबी के बिना बस न तो स्टार्ट हो सकी और न ही आसानी से नीचे उतारी जा सकी, जिससे अधिकारियों और कर्मचारियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। अंततः कंपनी ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए चाबी को फ्लाइट के जरिए हैदराबाद से चंडीगढ़ भेजा। वहां से देर शाम चाबी सोलन पहुंची, तब जाकर समस्या का समाधान हो सका।
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चाबी मिलने के बाद गुरुवार को बस को ट्राले से उतारकर सोलन से अर्की (मामलीग होते हुए) रूट पर सफल ट्रायल किया गया। इस दौरान HRTC और कंपनी के तकनीकी विशेषज्ञों ने बस की बैटरी क्षमता, चार्जिंग, ब्रेक सिस्टम, पिकअप और पहाड़ी रास्तों पर प्रदर्शन का गहन परीक्षण किया। खासतौर पर यह देखा जा रहा है कि फुल चार्ज में यह ई-बस पहाड़ी क्षेत्रों में कितनी दूरी तय कर सकती है।
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निगम के अनुसार, विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों में ट्रायल के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में हिमाचल में इलेक्ट्रिक बसों की खरीद और विस्तार को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा। यह घटना जहां एक ओर हल्की-फुल्की लापरवाही को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर राज्य में ई-मोबिलिटी की दिशा में बढ़ते कदमों को भी उजागर करती है।

















