नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित
(Vigilance Bureau Cracks Down on Corruption in 2025)वर्ष 2025 में विजिलेंस ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई करते हुए रिश्वतखोरी में लिप्त 187 व्यक्तियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई न केवल सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार पर करारा प्रहार मानी जा रही है, बल्कि आम जनता के बीच एक मजबूत संदेश भी दे रही है कि अब भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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विजिलेंस ब्यूरो द्वारा चलाए गए 127 ट्रैप मामलों में विभिन्न विभागों के 144 सरकारी कर्मचारी और 43 निजी व्यक्ति पकड़े गए। इनमें 18 गजटेड अधिकारी और 126 नॉन-गजटेड कर्मचारी शामिल हैं। पुलिस, राजस्व, बिजली, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, परिवहन, स्थानीय निकाय, वन, स्वास्थ्य और मंडी बोर्ड जैसे अहम विभागों के अधिकारी-कर्मचारी इस कार्रवाई की जद में आए हैं। इसके अलावा शिक्षा, सहकारिता, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा कार्मिक विभाग के कर्मचारियों पर भी शिकंजा कसा गया है।
विजिलेंस ब्यूरो ने आरोपियों के खिलाफ कुल 113 आपराधिक मामले दर्ज किए हैं, जबकि भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच के लिए 38 विजिलेंस जांचें शुरू की गईं। आय से अधिक संपत्ति के मामलों में भी 10 केस दर्ज कर दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए। अदालतों द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद 6 नॉन-गजटेड कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया जाना इस बात का संकेत है कि कार्रवाई केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है।
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अदालतों ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत 34 मामलों में 63 दोषियों को एक से पांच साल तक की सजा सुनाई, साथ ही लाखों रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। खास बात यह है कि इस दौरान कई प्रभावशाली और बड़े नाम भी जांच के दायरे में आए, जिससे यह साफ हो गया है कि कानून के सामने कोई भी व्यक्ति छोटा या बड़ा नहीं है।
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कुल मिलाकर, वर्ष 2025 में विजिलेंस ब्यूरो की यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ एक ऐतिहासिक कदम के रूप में देखी जा रही है, जो प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में अहम साबित होगी।

















