नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित
(Did Virat Kohli’s Leadership Push Yuvraj Singh Into Retirement)भारतीय क्रिकेट के सबसे विस्फोटक ऑलराउंडरों में शुमार और ‘सिक्सर किंग’ के नाम से मशहूर युवराज सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह है उनका वह बयान, जिसने क्रिकेट जगत में लंबे समय से चली आ रही एक संवेदनशील बहस को फिर से जिंदा कर दिया है। सानिया मिर्ज़ा के साथ एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में युवराज सिंह ने खुलकर कहा कि अपने करियर के अंतिम दौर में उन्हें टीम के भीतर वह सम्मान और सहयोग नहीं मिला, जिसकी उन्हें उम्मीद थी। यही निराशा साल 2019 में उनके संन्यास के फैसले की बड़ी वजह बनी।
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युवराज ने भावुक होते हुए बताया कि उस दौर में क्रिकेट उनके लिए खुशी का माध्यम नहीं रह गया था। उन्हें यह अहसास होने लगा था कि टीम मैनेजमेंट और नेतृत्व स्तर पर कोई उनका साथ देने वाला नहीं है। उनके इस बयान के सामने आते ही क्रिकेट जगत में हलचल तेज हो गई।
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इस बीच पूर्व भारतीय क्रिकेटर रॉबिन उथप्पा के पुराने बयान भी एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। उथप्पा ने दावा किया था कि तत्कालीन कप्तान विराट कोहली की लीडरशिप स्टाइल के चलते युवराज सिंह खुद को ‘अंडरवैल्यूड’ महसूस करने लगे थे। उनके अनुसार, कोहली की कप्तानी “My way or the highway” जैसी थी, जिसमें अनुभवी खिलाड़ियों के लिए बहुत कम लचीलापन था।
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फिटनेस को लेकर भी विवाद सामने आया। कैंसर से उबरने के बाद युवराज सिंह की फेफड़ों की क्षमता पहले जैसी नहीं रही थी और उन्होंने फिटनेस टेस्ट में केवल दो अंकों की छूट मांगी थी, लेकिन यह मांग ठुकरा दी गई। उथप्पा के मुताबिक, यो-यो टेस्ट जैसे सख्त मानक विराट कोहली के समर्थन से लागू किए गए, जिसका असर युवराज के करियर के आखिरी चरण पर साफ दिखाई दिया।
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उथप्पा ने विराट कोहली की ‘एक्सक्लूसिव’ लीडरशिप की तुलना रोहित शर्मा की ‘इन्क्लूसिव’ शैली से करते हुए कहा कि कोहली के कप्तानी दौर में कई खिलाड़ी खुद को असुरक्षित महसूस करते थे। युवराज सिंह के ताज़ा बयान ने इन तमाम दावों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है।

















