नई दिल्ली । राजवीर दीक्षित
India Moving Toward a Telecom Revolution: Set to Become a Global Leader with 6G Technology भारत अब टेलीकॉम तकनीक के क्षेत्र में दुनिया की अगुवाई करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है। केंद्र सरकार ने इस दिशा में एक बड़ा फैसला लेते हुए टेलीकॉम इनोवेशन से जुड़े 104 नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। केंद्रीय संचार राज्य मंत्री पेमासानी चंद्र शेखर के अनुसार इन परियोजनाओं के लिए टेलीकॉम टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TTDF) के माध्यम से लगभग 271 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य देश में शोध संस्थानों, स्टार्टअप्स और उद्योगों को प्रोत्साहित करना है ताकि वे अगली पीढ़ी की अत्याधुनिक टेलीकॉम तकनीक विकसित कर सकें। इससे भारत में स्वदेशी तकनीक के विकास को भी मजबूती मिलेगी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता बढ़ेगी।
⚡ 5G से 10 गुना तेज होगी 6G तकनीक: विशेषज्ञों के अनुसार आने वाली 6G नेटवर्क तकनीक, मौजूदा 5G सेवाओं से लगभग 10 गुना अधिक तेज होगी। इससे इंटरनेट की दुनिया में एक नई क्रांति देखने को मिलेगी। 6G के आने से अल्ट्रा-फास्ट क्लाउड कंप्यूटिंग, रियल-टाइम होलोग्राम कम्युनिकेशन, स्मार्ट सिटी टेक्नोलॉजी, सेल्फ-ड्राइविंग कारें और उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नेटवर्क जैसी सुविधाएं आम जीवन का हिस्सा बन सकती हैं। इससे डिजिटल कनेक्टिविटी और तकनीकी विकास को नई गति मिलेगी।
2030 तक 6G लॉन्च करने का लक्ष्य: भारत सरकार ने वर्ष 2030 तक 6G सेवाओं को लॉन्च करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत उन अग्रणी देशों में शामिल होना चाहता है जो सबसे पहले 6G तकनीक को लागू करेंगे। इसी उद्देश्य से सरकार ने “भारत 6G विज़न डॉक्यूमेंट” भी जारी किया है, जिसका मुख्य लक्ष्य स्वदेशी टेलीकॉम तकनीक विकसित करना और विदेशी सेवा प्रदाताओं पर निर्भरता कम करना है।
स्पेक्ट्रम के लिए तैयार किया गया रोडमैप : सरकार ने 6G तकनीक की टेस्टिंग और विकास के लिए एक चरणबद्ध योजना तैयार की है। इसके तहत स्पेक्ट्रम आवंटन को तीन चरणों में बांटा गया है—
शॉर्ट टर्म: 2025–2026
मीडियम टर्म: 2027–2030
लॉन्ग टर्म: 2031–2035
यह रोडमैप इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) के वैश्विक मानकों और अध्ययनों के आधार पर तैयार किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बड़े निवेश और रिसर्च के जरिए भारत आने वाले वर्षों में डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच सकता है।
















