चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“Oh my..! The strong room key went missing on the day of counting; officials arrived with a hammer and chisel”) कर्नाटक के दावणगेरे दक्षिण विधानसभा क्षेत्र की उपचुनाव मतगणना के दौरान एक बेहद हैरान करने वाली घटना सामने आई, जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए। पुराने पीबी रोड स्थित डीआरआर स्कूल में बनाए गए काउंटिंग सेंटर पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अधिकारियों को स्ट्रॉन्ग रूम की चाबियां ही नहीं मिलीं। सुबह करीब 7:36 बजे जिला चुनाव अधिकारी जी.एम. गंगाधरस्वामी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में जब स्ट्रॉन्ग रूम खोलने की प्रक्रिया शुरू हुई, तो पता चला कि रूम नंबर 1, 2 और 3 की चाबियां गायब हैं।
करीब 10 मिनट तक चाबियों की तलाश की गई, लेकिन जब कोई सफलता नहीं मिली तो अधिकारियों को मजबूरी में हथौड़े की मदद से ताला तोड़कर स्ट्रॉन्ग रूम खोलना पड़ा। इस लापरवाही के कारण मतगणना में देरी हुई और जो प्रक्रिया सुबह 8 बजे शुरू होनी थी, वह करीब 20 मिनट देरी से शुरू हो सकी।
इस पूरे घटनाक्रम ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला चुनाव अधिकारी ने मौके पर मौजूद कर्मचारियों को कड़ी फटकार लगाई और जिम्मेदारी तय करने के संकेत दिए। वहीं, सुरक्षा में एक और बड़ी चूक तब सामने आई जब एक भाजपा नेता, जो चुनाव एजेंट के रूप में अंदर जा रहा था, अपने जूतों में मोबाइल फोन छिपाकर लाने की कोशिश कर रहा था। पुलिस ने तलाशी के दौरान फोन बरामद कर लिया।
हालांकि, इस दौरान उक्त नेता ने पुलिस के साथ बहस भी की, लेकिन एसपी डॉ. एच.टी. शेखर ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे केंद्र से बाहर निकाल दिया और सख्त निर्देश जारी किए। इस घटना ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।



















