चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“Dera Beas gets major relief from the President; now it will be able to register land in its own name in Himachal”) हिमाचल प्रदेश से जुड़ा एक बड़ा और अहम फैसला सामने आया है, जिसने धार्मिक संस्थाओं और आम लोगों दोनों को बड़ी राहत दी है। राधा स्वामी सत्संग डेरा ब्यास को अब लैंड सीलिंग एक्ट से छूट मिल गई है। इस फैसले को द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने के बाद लागू किया गया है, जिसे एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
नई व्यवस्था के तहत अब धार्मिक और आध्यात्मिक संस्थाएं हिमाचल प्रदेश में 30 एकड़ तक जमीन अपने नाम ट्रांसफर करवा सकती हैं। पहले के नियमों के अनुसार किसी भी संस्था या व्यक्ति को इस तरह जमीन अपने नाम करवाने की अनुमति नहीं थी, जिससे कई बड़े प्रोजेक्ट और सेवाएं प्रभावित हो रही थीं।
इस फैसले का सबसे बड़ा असर हमीरपुर के भोटा में स्थित एक प्रसिद्ध चैरिटेबल अस्पताल पर पड़ा है, जो डेरा ब्यास से जुड़ा हुआ है। लंबे समय से मांग की जा रही थी कि इस अस्पताल की जमीन को महाराज जगत सिंह सेवा सोसायटी के नाम किया जाए, ताकि इसके प्रबंधन को और बेहतर बनाया जा सके। लेकिन 1972 के लैंड सीलिंग एक्ट के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा था।
स्थिति यहां तक पहुंच गई थी कि अगर जमीन ट्रांसफर की अनुमति नहीं मिलती, तो अस्पताल की सेवाएं बंद होने का खतरा भी पैदा हो गया था, जिससे हजारों लोगों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाएं प्रभावित हो सकती थीं। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद न सिर्फ इस अस्पताल को नई जिंदगी मिली है, बल्कि भविष्य में भी इस तरह की संस्थाओं को राहत मिलेगी।
इस फैसले से डेरा ब्यास के अनुयायियों में खुशी की लहर है, वहीं हिमाचल के लोगों ने भी सरकार और राष्ट्रपति का आभार जताया है। यह निर्णय सामाजिक और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।



















