चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“Big shock! The rupee has fallen sharply, with the Indian currency reaching a record low level”) भारतीय रुपये में आई तेज गिरावट ने बाजार और आम लोगों दोनों को चिंता में डाल दिया है। मंगलवार के शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 पैसे टूटकर 95.43 के स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक के सबसे निचले स्तरों में से एक है। इससे पहले सोमवार को भी रुपया 95.23 पर बंद हुआ था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव की खबरों ने बाजार की भावनाओं को कमजोर कर दिया है, जिसका सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ा है।
विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता के कारण निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं और बड़ी मात्रा में पूंजी निकाल रहे हैं। इसका फायदा अमेरिकी डॉलर को मिल रहा है, जबकि रुपया लगातार दबाव में है। डॉलर इंडेक्स में भी बढ़त देखी गई है, जो वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती को दर्शाता है।
इस स्थिति का एक बड़ा कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और फिलहाल कच्चा तेल 113 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। अगर पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहता है, तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे भारत का चालू खाता घाटा बढ़ेगा और महंगाई पर भी असर पड़ेगा।
वहीं विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी रुपये को कमजोर किया है। आंकड़ों के मुताबिक, मार्च से अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से 20 अरब डॉलर से ज्यादा की निकासी कर चुके हैं। इसका असर शेयर बाजार पर भी साफ नजर आ रहा है, जहां सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट दर्ज की गई।
कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव, महंगे तेल और विदेशी निवेश की निकासी जैसे कई कारकों ने मिलकर रुपये पर दबाव बढ़ा दिया है। अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले समय में अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर इसका और असर देखने को मिल सकता है।



















