डेरा बस्सी । राजवीर दीक्षित
(Female Doctor Attacked While Heading to Duty) डेरा बस्सी उप-मंडल अस्पताल के पास शुक्रवार सुबह एक महिला डॉक्टर पर कथित रूप से हमला किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि अपने मरीज को दूसरे अस्पताल रेफर किए जाने से नाराज दो अज्ञात युवकों ने महिला डॉक्टर के साथ मारपीट की।
पीड़ित डॉक्टर जोत नूर, जो अस्पताल में एनेस्थेटिस्ट (बेहोशी विशेषज्ञ) के रूप में कार्यरत हैं, ने आरोप लगाया कि हमलावरों ने उन्हें थप्पड़ मारे और धक्का-मुक्की की। किसी तरह उन्होंने अपनी कार में बैठकर दरवाजा लॉक किया, जिसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।
ड्यूटी पर जाते समय हुई घटना|
जानकारी के अनुसार, डॉ. जोत नूर शुक्रवार सुबह अपनी ड्यूटी पर जाने के लिए अस्पताल पहुंची थीं। उन्होंने अपनी कार वन विभाग कार्यालय के पास पार्क की और अस्पताल की ओर पैदल जा रही थीं। इसी दौरान दो व्यक्ति उनके पास आए और उनका पेशा पूछा।
जब डॉक्टर ने बताया कि वह एनेस्थेटिस्ट हैं, तो दोनों व्यक्तियों ने अचानक उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू कर दी। भयभीत डॉक्टर किसी तरह अपनी कार तक पहुंचीं और अंदर बैठकर खुद को सुरक्षित किया। इसके बाद आरोपी वहां से भाग निकले।
24 घंटे बाद भी कार्रवाई नहीं, डॉक्टरों में रोष घटना के बाद डॉ. नूर ने अपने सहकर्मियों को सूचना दी और डेरा बस्सी पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज करवाई।
अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों का आरोप है कि शिकायत दर्ज होने के 24 घंटे बाद भी पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। साथ ही अस्पताल स्टाफ की सुरक्षा के लिए भी कोई विशेष इंतजाम नहीं किए गए।
इसी के विरोध में अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों ने ओपीडी सेवाएं बंद कर दीं और अस्पताल परिसर के अंदर प्रदर्शन किया।
डॉक्टर बोले—यह पहला मामला नहीं प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों ने कहा कि अस्पताल स्टाफ के साथ दुर्व्यवहार और हमले की यह कोई पहली घटना नहीं है। उनका कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई न होने के कारण ऐसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक ओपीडी सेवाएं बंद रहेंगी। हालांकि मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आपातकालीन सेवाएं जारी रहेंगी।
पुलिस ने दर्ज किया मामला-
डेरा बस्सी के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (SMO) डॉ. धर्मिंदर सिंह ने बताया कि मामले की शिकायत पुलिस को दे दी गई है और पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है।
पहले भी हो चुकी है हिंसा की घटना- गौरतलब है कि 16 मई 2025 को भी मुकंदपुर गांव के दो युवक समूहों के बीच अस्पताल परिसर के अंदर हिंसक झड़प हुई थी। इस दौरान अस्पताल में तोड़फोड़ की गई थी।
रात के समय हुई इस घटना के दौरान मरीज और उनके परिजन जान बचाने के लिए अस्पताल से बाहर भागने को मजबूर हो गए थे। उस समय भी मेडिकल स्टाफ ने अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था की कमी और असुरक्षित कार्य वातावरण को लेकर गंभीर चिंता जताई थी।
उस घटना के बाद पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने अस्पताल स्टाफ की सुरक्षा बढ़ाने का आश्वासन दिया था, लेकिन ताजा हमले के बाद एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
डॉक्टरों की मांग-
आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी हो।
अस्पताल में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए।
डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
अस्पताल परिसर में हिंसा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
इस घटना के बाद चिकित्सा समुदाय में भारी रोष है और डॉक्टरों का कहना है कि यदि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई तो भविष्य में आंदोलन और तेज किया जा सकता है।



















