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PM मोदी का जालंधर दौरा: ₹5,500 करोड़ की सौगात, श्री गुरु रविदास एक्सप्रेस की शुरुआत, दोआबा पर बीजेपी की बड़ी रणनीति

चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित

(PM Modi’s Jalandhar Visit: ₹5,500 Crore Projects, Shri Guru Ravidas Express & BJP’s Big Doaba Strategy) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को जालंधर के दौरे पर आ रहे हैं। पिछले पांच महीनों में यह उनका दूसरा जालंधर दौरा होगा, जिसे पंजाब की राजनीति और विकास दोनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। करीब 90 मिनट के इस दौरे में प्रधानमंत्री लगभग 5,500 करोड़ रुपये की रेलवे और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत आधुनिक बनाए गए जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन का लोकार्पण करेंगे और देशभर के 75 पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों का वर्चुअल उद्घाटन भी करेंगे, जिनमें पंजाब के पांच स्टेशन शामिल हैं।

इस दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण श्री गुरु रविदास जी महाराज एक्सप्रेस होगी, जिसे प्रधानमंत्री हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। यह ट्रेन अमृतसर के छेहर्ता को वाराणसी से जोड़ेगी और पंजाब की रविदासिया संगत को गुरु रविदास जी के जन्मस्थान तक सीधी रेल सुविधा उपलब्ध कराएगी। माना जा रहा है कि इससे धार्मिक पर्यटन को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री इससे पहले 1 फरवरी 2026 को डेरा सचखंड बल्लां पहुंचे थे, जहां उन्होंने 649वें गुरु रविदास जयंती समारोह में भाग लिया था। उसी दौरान उन्होंने आदमपुर एयरपोर्ट का नाम बदलकर श्री गुरु रविदास जी एयरपोर्ट करने की भी घोषणा की थी। लगातार दूसरी बार जालंधर पहुंचना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि केंद्र सरकार दोआबा क्षेत्र को विशेष महत्व दे रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जालंधर, होशियारपुर, कपूरथला और शहीद भगत सिंह नगर को मिलाकर बनने वाला दोआबा क्षेत्र पंजाब की राजनीति का सबसे अहम इलाका है। यहां लगभग 45 प्रतिशत अनुसूचित जाति (SC) आबादी रहती है, जबकि पूरे पंजाब में SC आबादी करीब 32 प्रतिशत है, जो देश में सबसे अधिक है। डेरा सचखंड बल्लां का इस पूरे क्षेत्र में गहरा सामाजिक और धार्मिक प्रभाव माना जाता है और चुनावों के दौरान लगभग हर राजनीतिक दल यहां पहुंचता रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी के लगातार दौरे, गुरु रविदास जी के नाम पर नई परियोजनाएं और विकास कार्य केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इन्हें बीजेपी की सामाजिक और राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले दोआबा एक बार फिर सबसे अहम राजनीतिक रणभूमि बनता दिखाई दे रहा है, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।

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